कारकाबेड़ा में शिक्षा की नई शुरुआत,आजादी के बाद पहली बार खुला विद्यालय, गूंजी स्कूल की घंटी
अबूझमाड़ के सुदूर और दुर्गम क्षेत्र कारकाबेड़ा में शिक्षा की नई शुरुआत हुई है। आजादी के सात दशक बाद पहली बार इस गांव में प्राथमिक शाला का शुभारंभ हुआ, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और बच्चों में खुशी की लहर है। कलेक्टर नम्रता जैन की पहल पर शुरू हुए इस स्कूल ने बच्चों के भविष्य के लिए नई उम्मीद जगाई है। हाल ही में कोड़ेनार में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान ग्रामीणों ने गांव में स्कूल खोलने की मांग रखी थी।
बच्चों को मिली गणवेश और पाठ्यपुस्तकें: पास के गांवों को भी होगा लाभ
बच्चों को मौके पर ही निःशुल्क गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, स्लेट और पेंसिल वितरित किए गए। वर्तमान में एक अतिथि शिक्षक के माध्यम से पढ़ाई शुरू की गई है। आने वाले समय में पास के मरकूड़ गांव के बच्चे भी इस विद्यालय का लाभ ले सकेंगे। प्रशासन की यह पहल अबूझमाड़ क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे बच्चों को अब अपने गांव में ही शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
कलेक्टर की त्वरित पहल और प्रशासनिक सक्रियता
इस पर कलेक्टर नम्रता जैन और जिला पंचायत सीईओ आकांक्षा शिक्षा खलको ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल को आवश्यक निर्देश दिए। स्कूल शुरू करने की प्रक्रिया आसान नहीं थी। घने जंगल, जंगली जानवर और नक्सल प्रभाव के कारण यह सफर बेहद जोखिम भरा था अधिकारियों और शिक्षकों की टीम को नदी-नालों और पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए लगभग पांच घंटे पैदल चलकर गांव तक पहुंचना पड़ा। सर्वे में 20 बच्चों को शिक्षा के योग्य पाया गया, जिनके लिए तत्काल स्कूल शुरू किया गया। स्कूल खोलना सिर्फ प्रशासनिक काम नहीं था, यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी थी. हम चाहते हैं कि कारकाबेड़ा का हर बच्चा कलम पकड़े. यह विकास की नई शुरुआत है
