जंगल का रहस्यमयी पौधा है भटकटैया, जिसके फूल, तने और बीज में छिपे हैं औषधीय गुण
आयुर्वेद में कई ऐसी वनस्पतियां हैं, जो अपने औषधीय गुणों के लिए जानी जाती हैं. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण पौधा है भटकटैया. यह एक कांटेदार पौधा है, जिसका पंचांग यानी पांचों अंग (जड़, तना, पत्ती, फूल और फल) औषधीय गुणों से भरपूर हैं. भटकटैया का पौधा भले ही कांटों से भरा हो, लेकिन इसके हर हिस्से का उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में किया जाता है. इस पौधे के फल, फूल और तने में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, इसमें सोले, कार्पिडिन, एल्केलाइड, पोटैशियम नाइट्रेट और पोटैशियम क्लोराइड जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो कई बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं.
त्वचा की समस्या फायदेमंद:कटेरी पित्त और कफ की वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए उपयोगी है. इसके सेवन से पाचन में सुधार होता है, यकृत को स्वस्थ रखा जाता है, और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है. यह पित्त के अत्यधिक उत्पादन को नियंत्रित करता है, शरीर के तापमान को संतुलित करता है, और रक्त को शुद्ध करता है, जिससे त्वचा की समस्याएं जैसे मुंहासे और एक्जिमा में राहत मिल सकती है.
पाइल्स में फायदेमंद: ज्यादा मसालेदार, तीखा खाने से पाइल्स की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है, ऐसे में बवासीर का घरेलू उपाय बहुत ही फायदेमंद होता है. भटकटैया के फलों को कोशातकी के काढ़े में पकाकर प्रयोग करने से अर्श या पाइल्स में लाभ होता है.
बुखार की समस्या में फायदेमं: भटकटैया की जड़ और गिलोय को समान मात्रा में मिलाकर काढ़ा बना लें. 10-20 मिली काढ़ा को सुबह शाम पिलाने से बुखार तथा पूरे शरीर का दर्द कम होता है.
पेट दर्द में फायदेमंद:अक्सर पेट में गैस हो जाने पर पेट दर्द की समस्या होने लगती है. भटकटैया के फलों के बीज निकालकर उनको छाछ में डालें तथा उबालकर सुखा दें. फिर उनको रातभर मट्ठे में डुबोएं तथा दिन में सुखा लें. ऐसा 4-5 दिन तक करके उनको घी में तलकर खाने से पेट दर्द तथा पित्त संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है.
दांत दर्द में फायदेमंद: अगर दांत बहुत दुखता हो तो भटकटैया की बीजों का धुआं देने से तुरंत आराम मिलता है. भटकटैया की जड़, छाल, पत्ते और फल लेकर उनका काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से भी दांतों का दर्द दूर होता है.
खांसी में फायदेमंद: मौसम के बदलाव के कारण खांसी से परेशान हैं. वहां पर आधा से 1 ग्राम भटकटैया के फूल के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर चाटने से सब प्रकार की खांसी दूर होती है. इसके अलावा 15-20 मिली पत्ते का रस या 20-30 मिली जड़ के काढ़े में 1 ग्राम छोटी पीपल चूर्ण एवं 250 मिग्रा सेंधानमक मिलाकर देने से खांसी में आराम मिलता है.
अस्थमा में फायदेमंद: जब छाती में कफ भरा हुआ हो तब इसका 20-30 मिली काढ़ा देने से बहुत लाभ होता है. इसके फलों के 20-30 मिली काढ़े में 500 मिग्रा भुनी हुई हींग और 1 ग्राम सेंधा नमक डालकर पीने से अस्थमा में भी लाभ होता है. साथ ही भटकटैया के पंचांग को कूटकर आठ गुना पानी मिलाकर गाढ़ा होने तक पकाएं. गाढ़ा होने पर कांच की शीशी में रखें. इसमें 1 ग्राम मधु मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से आराम मिलता है.
सूचना ; प्राकृतिक औषधि होने के बावजूद भी इसके गलत या अधिक मात्रा में सेवन करने से सेहत को नुकसान पहुंच सकता है. इसी कारण जरूरी है कि किसी भी समस्या से छुटकारा पाने के लिए इसका सेवन या उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य से सलाह लें, खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, और स्तनपान कराने वाली माताओं को बिना सलाह के सेवन न करे।
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