मोबाइल टावर योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई गति - CGKIRAN

मोबाइल टावर योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई गति


“मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना” केवल संचार सुविधा बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह डिजिटल समावेशन, आर्थिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रहा है। छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों में डिजिटल क्रांति की आधारशिला रखी जा रही है। मोबाइल टावर योजना से  लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ में भौगोलिक विषमता, घने जंगलों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के कारण इसके बहुत से दूरस्थ गाँव विकास की मुख्यधारा से काफी दूर रहे। प्रदेश के ग्रामीण एवं वन्य क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी ने विकास की गति को काफ़ी धीमा किया हुआ था। विशेष रूप से मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी का अभाव ग्रामीणों के जीवन में एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा था। इस चुनौती को मात देने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने एक दूरदर्शी पहल करते हुए “मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना” लागू किया है। इस योजना के तहत इन इलाकों को मजबूत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ के सुदूर, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 5000 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए जा रहे हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी बन रही आधुनिक विकास की मजबूत बुनियाद

वर्तमान समय में डिजिटल कनेक्टिविटी को विकास की आधारशिला मानी जाती है। इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क संवाद शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, शासन और सुरक्षा जैसे हर क्षेत्र में परिवर्तन का माध्यम बन चुके हैं।ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में इंटरनेट की पहुँच होने से छात्र ऑनलाइन शिक्षा से जुड़ सकते हैं। किसान मंडी भाव और मौसम की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मरीज टेलीमेडिसिन सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। ग्रामीण डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं। सरकार की योजनाओं की जानकारी सीधे नागरिकों तक पहुँच सकती है। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने का संकल्प लिया है।

डिजिटल इंक्लूज़न की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मोबाइल टावर योजना वास्तव में डिजिटल इंक्लूज़न का एक बड़ा उदाहरण है।पहले जो आदिवासी और सुदूर क्षेत्र डिजिटल दुनिया से कटे हुए थे मगर इस योजना के बाद अब वे तेजी से डिजिटल मुख्यधारा का हिस्सा बन रहे हैं।इस योजनासे सामाजिक समानता बढ़ेगी।आर्थिक अवसरों का विस्तार होगा और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी


सुदूर वन्य क्षेत्रों में 5000 से अधिक मोबाइल टावर लगाने का लक्ष्य

इस योजना के तहत प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से 5000 से अधिक मोबाइल टावर की स्थापना किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।इन टावरों के माध्यम से 4G नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही हैं। भविष्य में 5G सेवाओं का मार्ग प्रशस्त होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी स्थापित होगी।सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि टावरों की कार्यक्षमता के लिए फाइबर नेटवर्क और बैकहॉल कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाए।

भारतनेट कार्यक्रम दे रहा भरपूर सहयोग

राज्य सरकार की इस पहल को भारतनेट कार्यक्रम के माध्यम से केंद्र सरकार का भी सहयोग मिल रहा है।करीब 3,942 करोड़ रुपए की लागत से 11,682 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।इस परियोजना के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर तक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पहुँचाया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों को तेज इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है। ग्रामीणों को डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल छत्तीसगढ़ को डिजिटल इंडिया मिशन का एक मजबूत हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

बस्तर और सरगुजा में हो रही नई शुरुआत

मोबाइल टावर योजना की शुरुआत बस्तर, कांकेर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों से की गई है। इन क्षेत्रों में 82 से अधिक नए टावर स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे कई दूरस्थ गाँव पहली बार मोबाइल नेटवर्क से जुड़े हैं।विशेष रूप से बस्तर संभाग के, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर जैसे जिलों में यह योजना बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है।इन क्षेत्रों में कई गाँव ऐसे थे जहाँ मोबाइल सिग्नल लगभग शून्य था और लोगों को नेटवर्क पाने के लिए कई किलोमीटर दूर पहाड़ियों पर जाना पड़ता था। मगर अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है।

टेकुलगुडेम में लगा पहला मोबाइल टावर

मोबाइल टावर योजना के अंतर्गत एक ऐतिहासिक कदम उस समय देखने को मिला जब सुकमा जिले के टेकुलगुडेम गाँव में पहला बीएसएनएल मोबाइल टावर स्थापित किया गया। क्षेत्र में संचार और सुरक्षा दोनों को मजबूत करने के उद्देश्य से यह टावर सीआरपीएफ के फॉरवर्ड ऑपरेशंस बेस कैंप में स्थापित किया गया है। इस टावर के प्रभाव से आसपास के कई गाँव जैसे टिम्मापुरम, जोनागुड़ा और पूवर्ती को नेटवर्क सुविधा मिलने लगी है। ग्रामीण अब अपने परिवार से वीडियो कॉल कर सकते हैं और इंटरनेट का उपयोग कर सकते हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी से शिक्षा के क्षेत्र में भी आ रहा है परिवर्तन

ऐसा प्रबल अनुमान है कि मोबाइल टावर योजना का बड़ा प्रभाव शिक्षा के क्षेत्र में दिखाई देगा क्योंकि अब दूरस्थ गाँवों के विद्यार्थी ऑनलाइन क्लास में भाग ले सकेंगे, वे डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकेंगे, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे, डिजिटल शिक्षा का महत्व कोविड-19 महामारी के दौरान अच्छी तरह से स्पष्ट हो चुका था।मोबाइल टावर योजना के माध्यम से ग्रामीण छात्रों को भी शहरों के छात्रों के समान अवसर मिल सकेंगे। 

सरकारी योजनाओं की बेहतर पहुंच

मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने से सरकारी योजनाओं का लाभ भी तेजी से ग्रामीणों तक पहुँच रहा है।अब ग्रामीणों को DBT योजनाओं की जानकारी, बैंकिंग अपडेट, एसएमएस अलर्ट समय पर मिल रहे हैं। डिजिटल कनेक्टिविटी के कारण शासन और जनता के बीच संवाद मजबूत हो रहा है।

टेलीमेडिसिन से मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

वनांचल के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी एक बड़ी समस्या रही है। कई बार इन ग्रामीणों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।लेकिन अब मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की सुविधा मिलने से इन ग्रामीणों को टेलीमेडिसिन सेवाएँ उपलब्ध होंगी, डॉक्टरों से इनका वीडियो परामर्श संभव हो सकेगा और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तुरंत प्राप्त हो सकेगी। छत्तीसगढ़ के साय सरकार की यह पहल विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मददगार साबित होगी।

मोबाइल टावर योजना से हो रहा सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार

ख़ास तौर से बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मजबूत संचार व्यवस्था, सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे क्षेत्रों में मोबाइल टावर स्थापित होने से सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बेहतर हुआ है। आपातकालीन सेवाओं में तेजी आ रही है। नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ी हैइससे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच संवाद अधिक प्रभावी हुआ है।

मोबाइल टावर योजना से आत्मनिर्भर हो रहा छत्तीसगढ़

मोबाइल टावर योजना केवल टेक्निकल प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर और इंक्लूसिव छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि विकास का लाभ राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। छत्तीसगढ़ में मोबाइल टावर योजना एक ऐसी ऐतिहासिक पहल है जो प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह साबित किया है कि यदि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और दूरदर्शी सोच हो तो कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ भी विकास के मार्ग में बाधा नही बन सकती।आज जब सुदूर जंगलों और पहाड़ियों में बसे गाँवों तक जब मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की सुविधा पहुँच रही है तो यह केवल सिग्नल का विस्तार नहीं होता बल्कि राज्य के जनता की उम्मीद, अवसर और आत्मविश्वास का भी विस्तार है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल से संवर रहा जीवन

दिसंबर 2023 में नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह स्पष्ट किया कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल सुविधा नहीं बल्कि नागरिकों का अधिकार है। प्रदेश के मुखिया का मानना है कि जब तक राज्य के अंतिम गाँव तक संचार और इंटरनेट की सुविधा नहीं पहुँचेगी, तब तक गाँव का समग्र विकास संभव नहीं है। इसी दृष्टिकोण के चलते राज्य की साय सरकार ने डिजिटल अवसंरचना को विकास की प्राथमिकता में शामिल किया है। 3 मार्च 2025 को प्रस्तुत किए गए बजट में मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना को शामिल किया गया था जिसे 4 फरवरी 2026 में औपचारिक स्वीकृति दे दी गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल यह दर्शाती है कि राज्य सरकार विकास को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि वह आदिवासी और सुदूर क्षेत्रों को भी समान अवसर देना चाहती है।

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