जनगणना 2027 की तैयारी जिला स्तर पर कर दी गई शुरू, पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया
देश की डिजिटल जनगणना की तैयारी चालू हो गयी है। देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद जनगणना अब पूरी तरह बदलने जा रही है। .इस बार कोई मोटी रजिस्टर-फाइल नहीं बल्कि मोबाइल ऐप, लाइव डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए घर-घर जानकारी जुटाई जाएगी। पिछली बार जनगणना 2011 में हुई थी और अब 2027 में होने जा रही है पिछली बार जब कोरबा जिले की जनगणना हुई थी तब जनसंख्या 12 लाख थी, जो अब बढ़कर लगभग 16 लाख तक पहुंच चुकी है. हालांकि यह एक अनुमानित आंकड़ा है. यह पहला अवसर है जब जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी. जनगणना का काम पूरा करने के लिए जिला स्तर से लगभग ढाई हजार शिक्षकों की ड्यूटी लगाई सकती जा सकती है. शुरुआत में यह जानकारी मिल रही थी कि जनगणना करने के लिए कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम पर लगाया जाएगा, लेकिन अब तक इसी अधिकृत पुष्टि नहीं हुई है.
कुछ दिन पहले एसआईआर की प्रक्रिया को भी पूरा किया गया है. इस प्रक्रिया के दौरान जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगी थी, उन्हें बेहद परेशान होना पड़ा था. जानकारी के अभाव में लोग काफी भयभीत थे. उन्हें डर था कि मतदाता सूची से उनका नाम कट जाएगा. इस वजह से लोग जानकारी देने में कतरा रहे थे. अब जब जनगणना की प्रक्रिया होने जा रही है, तब 33 बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जाएगी. इस बार की जनगणना बेहद विस्तृत जनगणना होगी. जिसमें जाति के साथ बेहद छोटी-छोटी जानकारी को शामिल किया गया है. परिवार के मुखिया से 33 बिंदुओं पर जानकारी ली जाएगी. घर में दो पहिया, चार पहिया वाहनों से लेकर फर्श की सामग्री, टॉयलेट है या नहीं. बिजली का स्रोत क्या है, एलपीजी कनेक्शन, टीवी इंटरनेट से लेकर रसोई घर तक की जानकारी को जनगणना पत्रक में नोट किया जाएगा.
देश में अब तक जितनी बार भी जनगणना की प्रक्रिया को पूर्ण किया गया है, उन सभी में से यह पहला अवसर होगा, जब यह प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होगी. पहले चरण में जनगणना करने वाले प्रगणक मकान की सूची तैयार करेंगे और स्मार्टफोन के जरिए ही पूरी प्रक्रिया को पूरा करेंगे. जनगणना करने वाले कर्मचारियों को मोबाइल और इंटरनेट का भत्ता भी मानदेय के तौर पर दिया जाएगा. इसके लिए प्रशिक्षण की प्रक्रिया जारी है. कई स्तर के प्रशिक्षण होने हैं. जिन्हें चार्जिंग अथॉरिटी का प्रभार दिया गया है, उनकी ट्रेनिंग भी पूरी कर ली गई है.
अब तक की जानकारी के अनुसार जनगणना की प्रक्रिया को पूर्ण करने के लिए लगभग ढाई हजार शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है. पिछली बार 2011 में जब जनगणना की प्रक्रिया को पूरा किया गया था तब जिले की आबादी कम थी. मकान की संख्या 2 लाख 80 हजार थी. लेकिन अब यह परिवार विभाजित हो चुके हैं, कुछ परिवार बढ़े भी हैं, जिसके कारण डिजिटल जनगणना 2027 को पूर्ण करने के लिए प्रगणक को अनुमानित 3 लाख 78000 मकान तक पहुंचना होगा. जो किसी चुनौती से कम नहीं है.
