इस साल 13 महीने का हिंदू नववर्ष
हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है और इसका समापन चैत्र माह की अमावस्या को किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी. यही कारण है कि इस दिन से चैत्र नवरात्र भी प्रारंभ होते हैं. इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026, गुरुवार को पड़ रही है. इसी दिन से हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) की शुरुआत होगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, इसे नव संवत्सर के रूप में मनाया जाता है.
देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू नववर्ष को अलग-अलग नामों से मनाने की परंपरा है.
उत्तर भारत में हिंदू नववर्ष
महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा
आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादी
सिंधी समाज में चेट्टी चंड
इस दिन लोग घरों की सफाई करते हैं, सजावट करते हैं और विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना करते हैं.
क्या है विक्रम संवत का इतिहास?
इतिहासकारों के अनुसार, विक्रम संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने की थी. हिंदू पंचांग इसी संवत पर आधारित है. यह ब्रिटिश (ईसवी) कैलेंडर से लगभग 57 वर्ष आगे चलता है. विक्रम संवत में वर्ष की गणना चैत्र माह से होती है.
क्यों खास है विक्रम संवत 2083?
आमतौर पर हिंदू नववर्ष 12 महीनों का होता है, लेकिन इस बार एक विशेष खगोलीय संयोग के कारण यह वर्ष 13 महीनों का होगा. साल 2083 में ज्येष्ठ मास दो बार आएगा. इसी वजह से वर्ष में अधिकमास जुड़ेगा. अधिकमास की अवधि 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है.
विक्रम संवत की प्रमुख विशेषताएं
विक्रम संवत चंद्र-सौर पंचांग पर आधारित है. इसमें चंद्रमा और सूर्य दोनों की गति के अनुसार गणना की जाती है. 60 वर्षों का संवत्सर चक्र होता है, जिसमें हर वर्ष का एक विशेष नाम और प्रभाव होता है. सभी प्रमुख हिंदू त्योहारों (नवरात्रि, रामनवमी, दीपावली, होली आदि) की तिथियां इसी पंचांग से निर्धारित की जाती हैं.
गुड़ी पड़वा: हिंदू नववर्ष का पहला त्योहार
हिंदू नववर्ष का पहला पर्व गुड़ी पड़वा माना जाता है. यह विशेष रूप से महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में उत्साह के साथ मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में गुड़ी लगाने, तेल से स्नान करने और नए कपड़े पहनने से पूरे साल सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है.
