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भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में अब टेटनस टॉक्सॉइड यानी TT वैक्सीन की जगह Td वैक्सीन (टेटनस और डिप्थीरिया) को प्राथमिकता दी जा रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल को बेहतर सुरक्षा की दिशा में कदम बताया जा रहा है. हालांकि ये बदलाव पूरी तरह से नया नहीं है, बल्कि पहले से चल रही व्यवस्था को व्यापक रूप से लागू करने की प्रक्रिया है. सरकारी जानकारी के मुताबिक अब TT की जगह Td वैक्सीन को शामिल किया जा रहा है. Td वैक्सीन टेटनस के साथ साथ डिप्थीरिया से भी सुरक्षा देती है. यानी जहां TT केवल टेटनस से बचाव करता था, वहीं Td दो बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा देता है. इस बदलाव को यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत लागू किया जा रहा है.
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में अहम बदलाव,TT की जगह Td वैक्सीन को प्राथमिकता
Friday, February 27, 2026
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भारत के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में अब टेटनस टॉक्सॉइड यानी TT वैक्सीन की जगह Td वैक्सीन (टेटनस और डिप्थीरिया) को प्राथमिकता दी जा रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल को बेहतर सुरक्षा की दिशा में कदम बताया जा रहा है. हालांकि ये बदलाव पूरी तरह से नया नहीं है, बल्कि पहले से चल रही व्यवस्था को व्यापक रूप से लागू करने की प्रक्रिया है. सरकारी जानकारी के मुताबिक अब TT की जगह Td वैक्सीन को शामिल किया जा रहा है. Td वैक्सीन टेटनस के साथ साथ डिप्थीरिया से भी सुरक्षा देती है. यानी जहां TT केवल टेटनस से बचाव करता था, वहीं Td दो बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा देता है. इस बदलाव को यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत लागू किया जा रहा है.
यह वैक्सीन खास तौर पर गर्भवती महिलाओं, 10 और 16 साल के किशोरों और जरूरत पड़ने पर बूस्टर डोज लेने वाले वयस्कों को दी जाती है. चोट या घाव की स्थिति में भी डॉक्टर जरूरत के हिसाब से Td लगाने की सलाह दे सकते हैं. खास बात यह है कि वैक्सीनेशन का शेड्यूल पहले जैसा ही रखा गया है. भारत में डिप्थीरिया के मामले पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और कई वयस्कों में इसके खिलाफ पर्याप्त इम्यूनिटी नहीं मिलती. ऐसे में Td वैक्सीन को शामिल करने से मातृ और सामुदायिक सुरक्षा मजबूत करने का मकसद बताया गया है. इसे ड्यूल प्रोटेक्शन की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है
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