मुस्लिम कर्मचारियों पर मेहरबान साय सरकार; रमजान को लेकर दी ये विशेष राहत
देश-प्रदेश में 19 फरवरी से पवित्र माह रमजान की शुरुआत हो चुकी है। पवित्र रमजान महीने को लेकर साय सरकार ने राज्य के सभी शासकीय मुस्लिम अधिकारी और कर्मचारियों को विशेष राहत दी है। छत्तीसगढ़ में जारी आदेश के मुताबिक, रमजान में सभी सरकारी विभागों, बोर्ड और निगम के कर्मचारियों को रेगुलर ऑफिस टाइम से एक घंटा पहले ऑफिस छोड़ने की अनुमति होगी. यह खास व्यवस्था राज्य में रमजान खत्म होने तक लागू रहेगी.रमजान का पाक महीना चल रहा है. कई राज्यों की सरकार की ओर से इस पाक महीने में मुस्लिम कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए समय से पहले छुट्टी करने की इजाजत दी जा रही है. दक्षिणी राज्य तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार ने भी रमजान के दौरान सरकारी और अर्ध-सरकारी ऑफिसों में मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटा पहले छुट्टी करने की इजाजत दे दी है उन्होंने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की सोच का ही प्रतिबिंब है। उन्होंने प्रदेश सरकार के इस फैसले के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे रोजा रख रहे कर्मचारियों को इबादत और पारिवारिक समय के लिए सहूलियत मिलेगी।
सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सलीम राज ने कहा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साईं के नेतृत्व में राज्य में हर जाति, धर्म, संप्रदाय और समाज की आस्था का सम्मान किया जा रहा है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के विजन का एक शानदार उदाहरण भी है.
मुस्लिम समाज के लिए यह महीना इबादत, रोजा और आत्म अनुशासन का विशेष समय माना जाता है। रमजान को रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना कहा जाता है। इस दौरान मुसलमान रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं फिर रात में विशेष नमाज यानी तरावीह अदा की जाती है, जिसमें पवित्र कुरान का पाठ किया जाता है। अपने गुनाहों की माफी भी मांगी जाती है। रोजा व्यक्ति को धैर्य, अनुशासन और आत्मनियंत्रण सिखाता है। दिनभर भूखा-प्यासा रहने से इंसान को जरूरतमंदों की परेशानियों का एहसास होता है, जिससे उसके भीतर संवेदनशीलता बढ़ती है।
इस महीने में जकात और सदका देना भी बेहद अहम माना जाता है। अपनी आमदनी का एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को देना समाज में बराबरी और भाईचारे की भावना को बढ़ाता है। रमजान की आखिरी दस रातें खास मानी जाती हैं, जिनमें शब-ए-कद्र की रात को हजार महीनों से बेहतर बताया गया है।
