स्वावलंबी छत्तीसगढ़ योजना: मशरूम की खेती से आत्मनिर्भर बने छात्र - CGKIRAN

स्वावलंबी छत्तीसगढ़ योजना: मशरूम की खेती से आत्मनिर्भर बने छात्र


छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग के विद्यार्थी इन दिनों मशरूम उत्पादन के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं. स्वावलंबी छत्तीसगढ़ योजना के तहत छात्र-छात्राएं न केवल ऑयस्टर मशरूम की खेती कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं बल्कि उसी कमाई से अपनी सेमेस्टर फीस भी जमा कर रहे हैं. अब तक 40 से 50 विद्यार्थियों की परीक्षा और सेमेस्टर फीस मशरूम बिक्री से प्राप्त आय से भरी जा चुकी है. यह पहल विद्यार्थियों को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित कर रही है और समाज को पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध करा रही है. गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवर्ती की पहल पर स्वावलंबी छत्तीसगढ़ योजना की शुरुआत की गई. इस योजना के तहत छात्र अपने नियमित कक्षा समय के अतिरिक्त मशरूम उत्पादन का कार्य कर रहे हैं. ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के मार्गदर्शन में यह कार्य संचालित हो रहा है.

छात्रा मुस्कान कुमारी ने बताया कि सबसे पहले कच्चे माल को बारीक काटकर उसका कटिया बनाया जाता है और उसका ट्रीटमेंट किया जाता है. इसके बाद बैगिंग की प्रक्रिया होती है. बैग में मशरूम का फंगस (स्पॉन) डाला जाता है और उन्हें रस्सियों में एक के ऊपर एक बांधकर हैंगिंग पद्धति से लटकाया जाता है. कुछ ही दिनों में उत्पादन शुरू हो जाता है. मुस्कान का कहना है कि आज के समय में सरकारी नौकरी पाना आसान नहीं है, इसलिए मशरूम उत्पादन जैसे स्वरोजगार भविष्य के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं. इससे घर बैठे अच्छी आय अर्जित की जा सकती है.

20-25 दिन में तैयार होता है ऑयस्टर मशरूम

छात्रा रागिनी कुमारी ने बताया कि वर्तमान में ऑयस्टर मशरूम की खेती की जा रही है. इसका उत्पादन चक्र लगभग 20 से 25 दिनों का होता है. तैयार मशरूम को बाजार में बेचने के साथ-साथ उससे कई वैल्यू एडेड उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं. इनमें मशरूम का अचार, चटनी, पाउडर, ड्राई मशरूम, बड़ी, चकली और सूप जैसे उत्पाद शामिल हैं. रागिनी ने बताया कि इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय से वह अपनी सेमेस्टर फीस भर रही हैं.

स्वरोजगार के साथ मार्केटिंग का भी अनुभव

विद्यार्थी केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि मशरूम प्रसंस्करण और मार्केटिंग भी सीख रहे हैं. इससे उनमें उद्यमिता के गुण विकसित हो रहे हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश करने के बजाय वे अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकते हैं.

पौष्टिकता से भरपूर है मशरूम

मशरूम एक पौष्टिक और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ है. यह हाई बीपी और शुगर जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है. नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कुपोषण की समस्या से भी बचाव होता है. गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का यह प्रयास न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल है बल्कि समाज को शुद्ध और ताजा पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है.

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