महिलाओं की उद्यमिता में बढ़ता रुझान, स्टार्टअप के जरिए बना रहीं नई पहचान
बस्तर जैसे वन संपन्न क्षेत्र में अब महिलाएं उद्यमिता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। गीदम विकासखंड में उद्यमिता विकास प्रशिक्षण से प्रेरित होकर कई महिलाओं ने स्वरोजगार की दिशा में नए प्रयास शुरू किए हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है।
पत्तल-दोना निर्माण से आत्मनिर्भरता की ओर
प्रशिक्षण से प्रेरित होकर रेणु पोटाम ने साल और अन्य वन पत्तों से पर्यावरण अनुकूल पत्तल और दोना बनाने की शुरुआत की। बस्तर क्षेत्र में कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होने के कारण यह कार्य लाभकारी साबित हो रहा है। प्लास्टिक के विकल्प के रूप में इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। उनका लक्ष्य इन उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ पर्यटन गतिविधियों से जोड़ना है, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार मिल सके। रेणु पोटाम अब अपने उद्यम को औपचारिक रूप से पंजीकृत कर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत ऋण लेने की तैयारी कर रही हैं। ऋण से आधुनिक मशीनें खरीदी जाएंगी, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में वृद्धि होगा।
लघु वनोपज और पारंपरिक उत्पादों को मिल रही पहचान
इसी क्रम में लुनिता चिमनकर ने लघु वनोपज से पौष्टिक गोंद के लड्डू बनाने का व्यवसाय शुरू किया है। उनका उद्देश्य स्थानीय वन उत्पादों को मूल्य संवर्धन के साथ बाजार तक पहुंचाना है। प्रेमलता यादव ने प्रशिक्षण के माध्यम से व्यवसाय संचालन की जानकारी लेकर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक मिठाइयों को व्यावसायिक पहचान देने का संकल्प लिया है। नगर पंचायत गीदम की सुचिता जैन ने केक, बिस्कुट और अन्य बेकरी उत्पादों का निर्माण शुरू कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया है। उनकी पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं।
महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल
उद्यमिता विकास कार्यक्रम के माध्यम से गीदम क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिखी जा रही है। वन संपदा, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रशिक्षण के समन्वय से यहां की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इन प्रयासों से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि वे पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रही हैं।
