अबूझमाड़ की धरती से अमन और शांति का संदेश, सीएम साय बोले- कभी माओवादियों का गढ़ रहा अबूझमाड़ अब शांति का प्रतीक - CGKIRAN

अबूझमाड़ की धरती से अमन और शांति का संदेश, सीएम साय बोले- कभी माओवादियों का गढ़ रहा अबूझमाड़ अब शांति का प्रतीक


कभी अबूझमाड़ और नारायणपुर को बारूद की गंध और गोलियों की तड़तड़ाहट के लिए जाना जाता था, लेकिन आज वहां की फिजा बदली हुई है. यह नजारा है पांचवें अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन का. इस दौड़ में न केवल बस्तर, बल्कि सात समंदर पार केन्या और इथोपिया के अंतरराष्ट्रीय धावकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. अबूझमाड़ की पावन धरती से शांति, सद्भाव और विकास का सशक्त संदेश देते हुए आज अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2026 का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया.  जहां 'लाल आतंक' का खौफ अब 'शांति की दौड़' में बदल चुका है. नारायणपुर में आयोजित पांचवें 'अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन' में आज एक नया इतिहास लिखा गया. केन्या और इथोपिया से लेकर देश के कोने-कोने से आए 5 हजार से ज्यादा धावकों ने यह साबित कर दिया कि अबूझमाड़ अब डर नहीं, बल्कि उम्मीद का दूसरा नाम है. नक्सलगढ़ के नाम से कुख्यात रहे अबूझमाड़ की सड़कों पर आज सन्नाटा नहीं, बल्कि हजारों कदमों की आहट गूंज रही थी. यह नजारा है पांचवें अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन का. हाथों में तिरंगा और दिल में शांति का पैगाम लिए, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हरी झंडी दिखाई, तो पूरा नारायणपुर 'भारत माता की जय' के उद्घोष से गूंज उठा.

पांचवें अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन का आयोजन

इस दौड़ में न केवल बस्तर, बल्कि सात समंदर पार केन्या और इथोपिया के अंतरराष्ट्रीय धावकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. कभी जिस रास्ते पर सुरक्षाबल संभलकर कदम रखते थे, आज वहां दुनिया भर के एथलीट बेखौफ दौड़ रहे हैं. साल 2018-19 में तत्कालीन एसपी जितेंद्र शुक्ला ने जिस उम्मीद के साथ इस मैराथन की नींव रखी थी. आज वह एक वटवृक्ष बन चुका है. इस आयोजन का सबसे भावुक और सशक्त पहलू यह रहा कि दौड़ में वो लोग भी शामिल थे, जो कभी मुख्यधारा से भटक कर नक्सलवाद की राह पर थे.

विदेशी मेहमानों ने दिखाया अपना दम

हालांकि आयोजन में कुछ छोटी-मोटी अव्यवस्थाओं को लेकर थोड़ी नाराजगी जरूर देखी गई, लेकिन शांति और विकास के इस महाकुंभ में वह उत्साह के आगे फीकी पड़ गई. परिणामों की बात करें तो विदेशी मेहमानों ने अपना दम दिखाया. इथोपिया के धावक फिरोमोसा अवस्तुगा ने पहला स्थान हासिल किया, तो वहीं मेरठ के अक्षय कुमार ने कड़ी टक्कर देते हुए दूसरा स्थान पाया, लेकिन सबसे ज्यादा तालियां बजीं बस्तर के बेटे के लिए...

डबल इंजन सरकार की नीतियों का परिणाम

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की नीतियों और नेतृत्व का परिणाम है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है और बस्तर लाल आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा. उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में लगे सुरक्षा बलों के अधिकारियों एवं जवानों के अदम्य साहस और पराक्रम को नमन करते हुए कहा कि उन्हीं के बलिदान और समर्पण से आज बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की मजबूत नींव पड़ी है.

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में बस्तर क्षेत्र में 351 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है तथा नए विकास कार्यों की घोषणा भी की गई है. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र पिछले चार दशकों से विकास से वंचित रहा, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा और बस्तर में विकास की गंगा निरंतर बहेगी. उन्होंने सम्पूर्ण बस्तर और छत्तीसगढ़ को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के सरकार के संकल्प को दोहराया.

महिला वर्ग में हरियाणा की मुन्नी देवी ने मारी बाजी

बड़े डोंगर निवासी भारतीय सेना के जवान ने बस्तर संभाग श्रेणी में पहला स्थान पाकर इलाके का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया. महिला वर्ग में हरियाणा की मुन्नी देवी ने बाजी मारी. यह दौड़ सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अबूझमाड़ के विश्वास की जीत है. यह संदेश है कि बंदूक की नली से निकली गोली खामोश हो सकती है, लेकिन शांति और विकास के लिए उठे कदम अब रुकने वाले नहीं हैं.

पूर्व नक्सली भी बने मैराथन का हिस्सा

इस आयोजन की सबसे विशेष और ऐतिहासिक बात यह रही कि आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं ने भी हथियार छोड़कर शांति और मुख्यधारा में लौटने का संदेश देते हुए मैराथन में हिस्सा लिया. नारायणपुर की अबूझमाड़िया जनजाति सहित स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी बनाया.

नक्सलवाद उन्मूलन का लक्ष्य और सुरक्षा बलों की सराहना

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश से नक्सलवाद को समाप्त करने का लक्ष्य इस साल 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि बस्तर संभाग, जिसमें नारायणपुर सहित सात जिले शामिल हैं, पूरी तरह से माओवादी हिंसा से मुक्त हो जाएगा। माओवाद विरोधी अभियानों में लगे सुरक्षा बलों के साहस, बलिदान और समर्पण की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके प्रयासों ने बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की मजबूत नींव रखी है।

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