खारुन नदी पर उच्च स्तरीय पुल और पहुंच मार्ग के लिए 16.37 करोड़ स्वीकृत
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने प्रमुख अभियंता को राशि स्वीकृति के संबंध में जारी किया परिपत्र राज्य शासन ने रायपुर जिले में मुख्य जिला मार्ग उरला-पठारीडीह-बेरला मार्ग में खारुन नदी पर उच्च स्तरीय पुल और पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 16 करोड़ 36 लाख 54 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से आज राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।
लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है। कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी।
यातायात विभाग के सर्वे के अनुसार इस मार्ग से हर छह घंटे में 80 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। शाम चार बजे से रात 10 बजे तक ट्रैफिक दबाव सबसे ज्यादा रहता है, जब रायपुर से पाटन और भिलाई की ओर जाने वाले वाहन लंबी कतारों में फंस जाते हैं। सड़क किनारे वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग भी जाम की बड़ी वजह बनती है। नया ब्रिज शुरू होने के बाद ट्रैफिक का दबाव दोनों पुलों में बंट जाएगा।
उरला, पठारीडीह और बेरला मार्ग क्षेत्र लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग कर रहा था। खारुन नदी में जलस्तर बढ़ने के दौरान आवागमन प्रभावित होने से लोगों को वैकल्पिक लंबा मार्ग अपनाना पड़ता है। उच्च स्तरीय पुल बनने से वर्षभर निर्बाध यातायात संभव होगा और ग्रामीण-शहरी संपर्क मजबूत होगा।
अधिकारियों के अनुसार पुल और पहुंच मार्ग निर्माण से औद्योगिक व कृषि क्षेत्रों के बीच आवाजाही आसान होगी। इससे स्थानीय व्यापार, परिवहन और दैनिक आवागमन को गति मिलेगी। शासन का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद आसपास के गांवों को सीधे बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार मिलेगी।
