बस्तर पंडुम का भव्य शुभारंभ - CGKIRAN

बस्तर पंडुम का भव्य शुभारंभ


बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से बस्तर पंडुम का शुभारंभ हुआ. मां दंतेश्वरी के पावन प्रांगण में भव्य रुप से कार्यक्रम का आगाज किया गया. आयोजन में पारंपरिक नृत्य, लोकसंगीत, वेशभूषा, रीति-रिवाजों और कलाओं की जीवंत झलक ने दर्शकों को बस्तर की आत्मा से जोड़ा. वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है।

बस्तर के 12 विधाओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंत्री केदार कश्यप ने इस मौके पर कहा कि बस्तर की संस्कृति और विरासत को सहेजना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि बस्तर आज बदलाव के दौर से गुजर रहा है और देश-विदेश में इसकी नई पहचान बन रही है.प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में बस्तर पंडुम के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल तक पहुंचाया जा रहा है. इस आयोजन में 12 विधाओं में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हो रही हैं.

बस्तर की परंपरा के प्रचार प्रसार की अपील

मंत्री कश्यप ने बस्तर को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध बताते हुए मां दंतेश्वरी मंदिर, ढोलकाल, बारसूर, चित्रकूट और तीरथगढ़ जैसे स्थलों का उल्लेख किया. उन्होंने युवाओं से पारंपरिक गीत-संगीत जैसे “आया माचो दंतेश्वरी” और “साय रेला” के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने का आह्वान किया. मंत्री केदार कश्यप ने अलग-अलग विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण करने के साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों के तैयार किए गए व्यंजनों को चखा.

जनप्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम को सराहा

इस मौके पर विधायक चैतराम अटामी ने कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की संस्कृति, परंपरा और विकास की झलक जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है. इस वर्ष आयोजन को ब्लॉक से जिला और आगामी चरण में संभाग स्तर तक विस्तारित किया जा रहा है.जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी ने कहा कि बस्तर पंडुम मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जो सांस्कृतिक संरक्षण के साथ सामाजिक एकता और गौरव की भावना को मजबूत करता है.



बस्तर की आत्मा को महसूस करने का माध्यम


बस्तर पंडुम के शुभारंभ के मौके पर कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल मंचीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा को महसूस करने का माध्यम है. इससे नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ रही है. कुआकोंडा पोटाकेबिन-2 के छात्रों के साहसिक मलखंभ प्रदर्शन ने खूब तालियां बटोरीं. ग्राम मोखपाल के नृत्य दलों और ग्राम मड़से के कलाकारों ने ग्रामीण हाट-बाजार के जनजीवन की जीवंत प्रस्तुति दी. जगदलपुर की बादल एकेडमी के कलाकारों की प्रस्तुतियां भी सराही गईं.

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