मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और पोषण सुधार की दिशा में महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन के मामले में बड़ी छलांग
केंद्रीय प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में इस वित्तीय वर्ष में बलौदाबाजार जिले की 5735 गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पहली बार जीवित बच्चे के जन्म पर महिला को कुल 5000 रुपए की राशि दी जाती है. इस योजना का उद्देश्य माताओं को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान वित्तीय सहायता देना है, ताकि वे पौष्टिक आहार, आराम और नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित कर सकें. योजना के तहत पहली बार जीवित बच्चे के जन्म पर महिला को कुल 5000 रुपए की राशि दी जाती है. राशि DBT के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे पहुंचती है महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अतुल परिहार ने बताया कि अप्रैल 2022 से लागू PMMVY 2.0 में अब राशि दो किस्तों में दी जाती है, जबकि यदि दूसरी संतान बेटी हो तो महिला को 6,000 रुपए की एकमुश्त सहायता दी जाती है.महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी के अनुसार, जिले के ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक महिलाएं योजना से जुड़ सकें. स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित चेकअप और टीकाकरण की सुविधा भी सुनिश्चित की जा रही है.
ऑनलाइन हुई योजना में आवेदन, स्वीकृति व भुगतान की पूरी प्रक्रिया
रिपोर्ट के मुताबिक PMMVY-CAS नामक डिजिटल पोर्टल के माध्यम से अब प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना में आवेदन, स्वीकृति और भुगतान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है. लाभार्थी भी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपने आवेदन की स्थिति देख सकती हैं.
पंजीकरण के लिए गर्भावस्था की शुरुआत में करना होता है संपर्क
उल्लेखनीय है इस योजना के तहत महिलाओं को पंजीकरण के लिए गर्भावस्था की शुरुआत में आंगनवाड़ी केंद्र से संपर्क करना होता है. पात्रता के लिए महिला भारतीय नागरिक होनी चाहिए और किसी सरकारी नौकरी में न हो. लाभ प्राप्त करने के लिए गर्भावस्था के समय पर चिकित्सा जांच, प्रसव पंजीकरण और नवजात शिशु का प्रथम टीकाकरण अनिवार्य है.जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाती हैं. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं घर-घर जाकर पात्र महिलाओं की पहचान करती हैं, फॉर्म भरने में मदद करती हैं और उन्हें समय पर लाभ दिलवाती हैं.केंद्र सरकार के इस योजना से माताओं के पोषण स्तर और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार देखा जा रहा है. ग्रामीण इलाकों में पहले जहां कई महिलाएं इस योजना से अनजान थीं, वहीं अब स्वयं आगे आकर लाभ ले रही हैं. वहीं, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और स्वीकार्यता ने इसे और अधिक सरल बना दिया है.
