छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का ऐतिहासिक सरेंडर : वंदे मातरम्’ उद्घोष के साथ समाज की मुख्य धारा में लौटे 210 माओवादी
17 अक्टूबर का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा.क्योंकि इस दिन बस्तर को नक्सलमुक्त करने के अभियान में सरकार को सबसे बड़ी सफलता मिली.जब सरकार के सामने 210 से ज्यादा नक्सलियों ने लाल आतंक का रास्ता छोड़कर अपने जीवन को फिर से शुरु करने का फैसला लिया.यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं. यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं.
गौरतलब है एक साथ 210 नक्सलियों का आत्म-समर्पण विश्वास, सुरक्षा और विकास की दिशा में बस्तर की नई सुबह का संकेत है. लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र में यह ऐतिहासिक घटनाक्रम नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज होगा. वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह क्षण केवल 210 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण का नहीं, बल्कि बस्तर में विश्वास, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया। निः संदेह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अपनाई गई व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति ने क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव रखी है. पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और सजग नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में परिवर्तित किया जा सका है.
उल्लेखनीय है इतिहास में 17 अक्टूबर, 2025 का दिन तारीख की तरह याद रखा जाएगा. जब ‘वंदे मातरम्' की गूंज के साथ सामज की मुख्य धारा में लौटे 210 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर नहीं कहानी लिखी. यह दिन बस्तर के, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बनेगा.
आज का दिन छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक: सीए साय
सीएम साय ने कहा कि आज बस्तर में 210 नक्सली, जो कभी माओवाद के झूठ में उलझकर वर्षों तक अंधेरी राहों पर भटकते रहे, उन्होंने संविधान और हमारी नीतियों पर विश्वास जताते हुए विकास की मुख्यधारा को अपनाया है। आज उन्होंने अपने कंधों से बंदूक उतारकर, अपने हाथों में संविधान को थामा है। आज बस्तर में बंदूकें छोड़कर सुशासन पर विश्वास जताने वाले इन युवाओं से मुलाकात मेरे जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोष देने वाले पलों में से एक है। हमारी “नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025”, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” जैसी योजनाएँ, विश्वास और परिवर्तन का आह्वान है। इन्हीं नीतियों की ताकत है कि आज नक्सली हमारी सरकार की विश्वास और विकास की प्रतिज्ञा को स्वीकार कर रहे हैं, बंदूक छोड़कर आत्मसमर्पण की राह चुन रहे हैं।
आज का यह दृश्य इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है। यह क्षण हमारी सरकार की उपलब्धि से बढ़कर, छत्तीसगढ़ के शांतिपूर्ण भविष्य का शिलान्यास है। हमारी सरकार आत्मसमर्पितों के पुनर्वास और बेहतर भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है। डबल इंजन सरकार की प्रतिज्ञा है, छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने की और प्रधानमंत्री श्नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में यह प्रतिज्ञा पूर्ण हो रही है।
बस्तर में शांति, विकास के दूत बनेंगे आत्मसमर्पित नक्सली : डीजीपी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम ने कहा कि “पूना मारगेम केवल नक्सलवाद से दूरी बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने का अवसर है। जो आज लौटे हैं, वे बस्तर में शांति, विकास और विश्वास के दूत बनेंगे।” उन्होंने आत्मसमर्पित कैडरों से समाज निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाने का आह्वान किया। इस अवसर पर एडीजी (नक्सल ऑपरेशन्स) विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ बस्तर रेंज प्रभारी, कमिश्नर डोमन सिंह, बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी., कलेक्टर हरिस एस, बस्तर संभाग के सभी पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

