तेज शोर वाला पटाखा कानों के लिए कितना नुकसानदायक....तेज आवाज वाले पटाखे से रहे सावधान - CGKIRAN

तेज शोर वाला पटाखा कानों के लिए कितना नुकसानदायक....तेज आवाज वाले पटाखे से रहे सावधान

 


धनतेरस और दीपावली में लोग पटाखे फोड़कर उत्सव मनाते हैं. लेकिन तेज ध्वनि वाले पटाखे मनुष्य के कान को प्रभावित करते हैं. ऐसे में जानकार बताते हैं कि 70 डेसिबल तक के आवाज को कान सहन करता है. लेकिन 80 डेसिबल से लेकर 120 डेसिबल तक तेज शोर वाला पटाखा या किसी भी चीज जिसकी तेज ध्वनि होती है तो इसका सीधा असर मनुष्य के कानों पर पड़ता है. इसके साथ ही पटाखे की तेज ध्वनि सांस लेने में परेशानी होने वाले लोगों को और भी तकलीफ देती है. अस्थमा के मरीज भी इससे प्रभावित होते हैं. ऐसे में दिवाली पर्व में पटाखा फोड़ते समय और फुलझड़ी जलाते समय बहुत ज्यादा सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है.

 ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि पटाखों का जो शोर होता है,वह 80 डेसीबल से 120 डेसीबल के आसपास होता है. मनुष्य के कान 70 डेसीबल तक के आवाज प्रभावित नहीं करते, लेकिन 70 से अधिक डेसिबल से अधिक वातावरण में शोर होता है तो उसे हानिकारक माना गया है.

कान के आसपास तेज पटाखे फोड़ते हैं तो भी कान के लिए हानिकारक है. ध्वनि, हवा और उनसे निकलने वाला प्रदूषण लाइट भी हानिकारक है. किसी भी उत्सव के दौरान पटाखे फोड़ने से मनुष्य और इसका वातावरण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है.कान में यदि पटाखों के साथ ही दूसरी कोई ध्वनि तेज होती है तो यह नुकसानदायक है. इसके साथ ही पटाखों के बारूद की वजह से शरीर में परेशानी होती है- डॉ राकेश गुप्ता,ईएनटी स्पेशलिस्ट

 ईएनटी स्पेशलिस्ट  गुप्ता के मुताबिक दिवाली के समय हमें बहुत ज्यादा सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट में अशोक गोपाल ने एक याचिका साल 2018 में लगाई थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बारूद वाले पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके साथ ही ग्रीन पटाखे को बाजार में बेचने की अनुमति दी थी. साल 2018 से लेकर साल 2024 तक लोगों की जागरूकता की वजह से बारुद वाले पटाखों का उपयोग कम हुआ है.

 सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बाजार में जो ग्रीन पटाखें बिक रहे हैं उन पटाखों में भी बहुत ज्यादा मॉनिटरिंग करने की जरूरत है. पटाका निर्माता ग्रीन पटाखों का लेवल लगाकर सामान्य पटाखा बेचते हैं.इस तरह के पटाखे हवा और मनुष्य के स्वास्थ्य के साथ ही श्वास के लिए या ऐसे मरीजों के लिए जिनको सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत हो रही है, अस्थमा के पेशेंट हैं. ऐसे लोगों को इस तरह के पटाखे बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं.

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