'नक्सलमुक्त जिले में इस बार मनेगी खुशियों की दिवाली': जहां था आतंक का गढ़ वहां आज लाखों नौजवान बस्तर ओलंपिक में दिखा रहे जलवा

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर में 210 नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने पर हर्ष जताया है। पीएम मोदी ने कहा कि बस्तर कभी माओवादी आतंक का गढ़ हुआ करता था, लेकिन उसी बस्तर में आज लाखों नौजवान बस्तर ओलंपिक में आकर खेल के मैदान में अपनी ताकत दिखा रहे हैं। ऐसे में इस बार माओवादीमुक्त क्षेत्र में दिवाली की रौनक कुछ और होने जा रही है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। पहली बार नक्सल विरोधी मुहिम को बड़ी सफलता मिली है। शासन की नक्सल पुनर्वास नीति और नियदनेल्लानार योजना के बेहतर क्रियान्वयन के फलस्वरुप 17 अक्तूबर को बस्तर संभाग कैडर के 210 नक्सली हिंसा का रास्ता त्यागकर मुख्यधारा में लौट आये। सीएम विष्णुदेव साय और प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा के सामने दंडकारण्य क्षेत्र के 210 माओवादी कैडर ने हिंसा का रास्ता त्यागकर मुख्यधारा में लौट आये। ‘पूना मारगेम-पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम के तहत इन्हें मुख्यधारा में शामिल कराया गया। यह देश का सबसे बड़ा माओवादी आत्मसमर्पण है। यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है।
सीएम साय ने एक्स पर जो वीडियो पोस्ट किया है। उसमें पीएम मोदी कह रहे हैं कि कभी मीडिया की हेडलाइंस हुआ करती थी। छत्तीसगढ़ के बस्तर में ये हुआ, वो हुआ। एक पूरी बस को उड़ा दिया। इतने सुरक्षाबलों के जवान मारे गए बस्तर के माओवादी आतंकियों के हाथों। नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था और आज उसी बस्तर एक उदाहरण देता हूं। आदिवासी नौजवान बस्तर ओलंपिक का आयोजन करते हैं और लाखों नौजवान बस्तर ओलंपिक में आकर खेल के मैदान में अपनी ताकत दिखा रहे हैं। यह बदलाव है।
उन्होंने आगे कहा कि साथियों इस बार माओवादी आतंक से मुक्त क्षेत्रों में दिवाली की रौनक कुछ और होने जा रही है। 50–55 साल हुए, कुछ लोगों ने दिवाली नहीं देखी थी, अब दिवाली देखेंगे और मुझे पक्का विश्वास है दोस्तों कि हमारी मेहनत रंग लाएगी और वहां भी खुशियों के दीये जलेंगे। मैं आज देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि वह दिन दूर नहीं जब देश नक्सलवाद और माओवादी आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा। यह भी मोदी की गारंटी है।