कृषि
कृषि मेले में टूटे रिकॉर्ड, 11 करोड़ के कृषि मशीनरी की हुई बिक्री, 30 हजार से ज्यादा इस मेले में किसान
Tuesday, February 14, 2023
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देश में कृषि क्षेत्र में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी दी जाती है। ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल कर सकें। साथ ही सरकार द्वारा किसानों को इन नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिए किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण एवं प्रदर्शनी का भी आयोजन करवाया जाता है। मेले में कृषि यंत्रों के अतिरिक्त उद्यान, बीज, पौधा संरक्षण, भूमि संरक्षण, उर्वरक, प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री के साथ एग्रो प्रोसेसिंग यंत्रों का भी बिक्री एवं प्रदर्शन किया गया.
बिहार के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. राजधानी पटना में राज्यस्तरीय कृषि यांत्रिकरण मेले की 9 फरवरी से शुरुआत हो गई है. इस मेले का हिस्सा बन किसान आधुनिक कृषि यंत्र से रूबरू हो सकेंगे.देश के किसानों को आधुनिकता के साथ जोड़ने की भरपूर कोशिश की जा रही है. इसके लिए कृषि क्षेत्र में कृषि यंत्रीकरण को भी लगातार सरकार बढ़ावा दे रही है. इसके लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर कृषि यंत्रों की खरीद पर भारी सब्सिडी भी दे रही हैं.
पटना के गांधी मैदान में आयोजित एग्रो बिहार मेले का समापन हो गया है. इस बार मेले में किसानों ने जमकर कृषि यंत्र की खरीदारी की. कृषि विभाग के सचिव ने कहा कि अंतिम दिन इस मेले में किसानों द्वारा सेल्फ प्रोपेल्ड रीपर, रीपर-कम-बाईंडर, स्ट्राॅ रीपर, राईस मिल, मल्टी क्राॅप थ्रेसर, सीड-कम-फटिलाईजर ड्रील और थ्रेसर सहित 187.77 लाख रुपये के 114 कृषि यंत्रों की खरीदारी की गई है, जिस पर 76,18,600 रुपये की सब्सिडी दी गई है.
उन्होंने कहा कि 4 दिनों तक चले इस मेले में 11 करोड़ रुपये के कुल 665 कृषि यंत्रों की खरीदी की गई, जिस पर 481.73 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई. राज्य सरकार द्वारा राज्य में किसानों को 90 प्रकार के कृषि यंत्रों की खरीदारी करने पर 94.05 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है. साथ ही सरकार द्वारा किसानों को फसल अवशेष जलाने के बदले उनका खेतों में ही प्रबंधन कर खाद के रूप में उपयोग करने को लेकर प्रोत्साहित किया गया.
इस मेले में फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित यंत्र जैसे स्ट्राॅ रीपर, रीपर-कम- बाईंडर, सुपर सीडर आदि की भी बिक्री बड़ी संख्या में हुई है. इससे पता चलता है कि राज्य के किसान मृदा एवं पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक हैं. सचिव ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में फसल अवशेष जलने की घटना में कमी आयेगी.
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