सहकारिता के साथ हरित ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम - सूरज की रोशनी बनी सहकारिता की बचत का आधार
सहकारिता के माध्यम से किसानों को सेवाएं उपलब्ध कराने वाली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां अब हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित राजनांदगांव द्वारा सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक और ऊर्जा सक्षम बनाने की दिशा में अभिनव पहल करते हुए समितियों में सोलर पैनल स्थापित किए जा रहे हैं। इस पहल से जहां समितियों के बिजली खर्च में कमी आ रही है, वहीं नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिल रहा है।
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के कार्यक्षेत्र अंतर्गत राजनांदगांव जिले की 18 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में 3 से 5 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 9 सहकारी समितियों के भवनों में सोलर पैनल स्थापना की प्रक्रिया प्रगतिरत है। सौर ऊर्जा के उपयोग से समितियों के नियमित विद्युत व्यय में उल्लेखनीय कमी आने लगी है। पहले इन सहकारी समितियों को प्रतिमाह लगभग 8 से 10 हजार रूपए तक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। सोलर पैनल स्थापित होने के बाद बिजली बिल में कटौती होने से समितियों पर आर्थिक भार कम हुआ है। बिजली पर खर्च होने वाली राशि की बचत समितियों की आर्थिक कार्यक्षमता को मजबूत करने में सहायक साबित हो रही है। साथ ही यह पहल पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
बैंक की शाखाएं भी हो रहीं सौर ऊर्जा से रोशन
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक ने समितियों के साथ अपनी शाखाओं को भी सौर ऊर्जा से जोडऩे की दिशा में कदम बढ़ाया है। बैंक द्वारा स्वयं के भवन में संचालित 7 शाखाओं में 5-5 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल स्थापित किए जा रहे हैं। इन शाखाओं में पहले प्रतिमाह लगभग 10 से 15 हजार रूपए तक विद्युत बिल का भुगतान किया जाता था। सौर ऊर्जा के उपयोग से विद्युत बिल में कमी आने के साथ बैंक को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है।
प्रधान कार्यालय में हर माह 80 से 90 हजार रूपए की हो रही बचत
सौर ऊर्जा के उपयोग का प्रभाव बैंक के प्रधान कार्यालय में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पूर्व में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के प्रधान कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के माध्यम से 50 किलोवाट क्षमता का सोलर संयंत्र स्थापित कराया गया। पहले प्रधान कार्यालय का बिजली बिल प्रतिमाह एक लाख रूपए से अधिक आता था। सोलर संयंत्र स्थापित होने के बाद यह घटकर लगभग 8 से 10 हजार रूपए प्रतिमाह रह गया है। इस तरह बैंक को बिजली खर्च में प्रतिमाह लगभग 80 से 90 हजार रूपए की बचत हो रही है।
सौर ऊर्जा से हो रही यह बचत न केवल बैंक के संचालन व्यय को कम कर रही है, बल्कि सहकारिता क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी उपयोग का उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है। बैंक द्वारा अपने कार्यक्षेत्र की सभी सहकारी समितियों में चरणबद्ध रूप से सोलर पैनल लगाया जा रहा हैं, ताकि अधिक से अधिक समितियां बिजली खर्च कम कर स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा का उपयोग कर सकें। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की यह पहल सहकारिता, आर्थिक बचत और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए हरित ऊर्जा की दिशा में सकारात्मक बदलाव की कहानी लिख रही है।
