दुर्ग सेंट्रल जेल में खुली जेल की शुरुआत, अच्छे आचरण वाले बंदी बाहर जाकर करेंगे काम
छत्तीसगढ़ में जेल सुधार की दिशा में एक नई शुरुआत हुई है. प्रदेश का पहला ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन यानी खुली जेल अब दुर्ग केंद्रीय जेल में शुरू हो गया है. मंगलवार को डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने इसका औपचारिक शुभारंभ किया. इस मौके पर जेल अधीक्षक मनीष संभाकर समेत जेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बंदी मौजूद रहे.
सामान्य जीवन की तैयारी
ओपन जेल का उद्देश्य बंदियों को नियंत्रित वातावरण में काम करने का अवसर देना है, ताकि उनमें जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना विकसित हो। इसके जरिए उन्हें जेल से बाहर सामान्य जीवन के लिए तैयार करने और समाज की मुख्यधारा से जोडऩे पर जोर दिया जाएगा।
पुनर्वास पर जोर
ओपन जेल की व्यवस्था में बंदियों को कारावास की सीमाओं के भीतर रखने के साथ उन्हें जिम्मेदारी के साथ काम करने का अवसर दिया जाता है। दुर्ग में शुरू हुई यह व्यवस्था जेल सुधार और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में नई पहल है। इसके संचालन और परिणामों के आधार पर भविष्य में इसे आगे विस्तार दिया जा सकता है।
21 सितंबर को जारी हुई अधिसूचना
ओपन जेल शुरू करने के संबंध में छत्तीसगढ़ शासन ने 21 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद दुर्ग केंद्रीय जेल में प्रदेश की पहली ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन शुरू की गई। शुभारंभ के दौरान जेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
तय नियमों के तहत होगी आवाजाही
जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बताया कि केंद्रीय जेल दुर्ग में उपलब्ध अधोसंरचना का उपयोग करते हुए ओपन जेल की व्यवस्था विकसित की गई है। चयनित बंदी सुबह जेल से बाहर जाकर काम कर सकेंगे। शाम को लॉकअप की प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी की वापसी सुनिश्चित की जाएगी। बाहर काम के दौरान बंदियों की निगरानी और निर्धारित नियमों का पालन कराया जाएगा।
