महिलाओं ने इको फ्रेंडली राखियों से बनाई पहचान,कलाई पर सजेगा बस्तर का हुनर
बस्तर की महिलाएं राखी बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं. बस्तर के हटपदमुर की महिलाओं ने इस साल इको-फ्रेंडली राखियों का निर्माण किया है, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है. बस्तर की महिलाएं स्वयं उद्यमिता के माध्यम से राखी बनाकर आय अर्जित कर रही हैं. हटपदमुर की महिलाओं ने लाल भाजी, धान और पालक भाजी जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करके राखियां बनाई हैं. इन राखियों की सुंदरता लोगों को आकर्षित कर रही है और ये पर्यावरण के अनुकूल भी हैं.
हटपदमुर की ये महिलाएं एक स्वयं सहायता समूह बनाकर राखी बनाने का काम कर रही हैं. इस समूह में दस महिलाएं शामिल हैं और उन्होंने अब तक लगभग 5,000 राखियां बेची हैं. राखी बनाने के अलावा, वे बूंदी और गुलाब जामुन भी बनाकर बेच रही हैं, जिससे उनकी अतिरिक्त आय हो रही है.
स्वयं सहायता समूह की सदस्य भूमिका ठाकुर ने बताया कि यह उनका पहला साल है जब वे राखी बना रही हैं. उन्हें आरटीसी से प्रशिक्षण मिला, जिसके बाद उन्होंने सामग्री खरीदकर राखियां बनाना शुरू किया. वे पिछले दो महीनों से राखी बना रही हैं. वे इको-फ्रेंडली राखियां बना रही हैं, जिसमें पालक भाजी, चावल, बांस, लाल भाजी और धान की बालियों का उपयोग किया जा रहा है. बांस और धान की एक राखी 50 रुपये में बेची जा रही है.
भूमिका ठाकुर ने बताया कि राखी बनाने से पहले वे समूह से जुड़ी थीं और अब वे इस व्यवसाय से जुड़कर खुश हैं. उन्होंने कहा कि खुद का व्यवसाय करने में अच्छा लग रहा है और उनकी राखियों की मांग काफी अच्छी है.
