छत्तीसगढ़ के किसान अब धान और सब्जियों के साथ फूलों की खेती में भी जोर
छत्तीसगढ़ के बस्तर के किसान अब धान और सब्जियों की पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती की ओर भी बढ़ रहे हैं. इसी कड़ी में बस्तर के एक किसान मिलेश पटेल कुंद के फूलों की खेती कर रहे हैं, जो बाजार में अच्छी कीमत पर बिकते हैं और इनकी मांग भी ज्यादा हो रही है. मिलेश पटेल ने बताया कि कुंद का फूल एक उच्च मांग वाली फसल है, जिसका बाजार भाव 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक है. यह फूल 7 महीने तक खिलता है. पूजा-पाठ और घरों की सजावट में इसका काफी उपयोग होता है. इस फूल की खेती में ज्यादा देखरेख की जरूरत नहीं होती है और इसे लगाने में शुरुआती खर्च भी कम आता है.
मिलेश पटेल ने एक पौधे से कुंद फूल की खेती शुरू की थी, जो अब लगभग 25 डिसमिल क्षेत्र में फैल चुकी है. उन्होंने बताया कि इसका पौधा एक बार लगाने के बाद कई सालों तक फूल देता है. उनकी खेती को अब 10 साल हो चुके हैं. कुंद फूल लगाने के लिए पहले खेत की जुताई की जाती है और फिर बेड तैयार किए जाते हैं. एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच तीन मीटर की दूरी रखी जाती है. बरसात के मौसम में ऊपर से खाद डाली जाती है. पौधों को कीड़ों से बचाने के लिए कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है. ठंड के मौसम में कटिंग करके गोबर की खाद डाली जाती है.
फूल लगाते समय डीएपी, पोटाश, यूरिया और गोबर की खाद का उपयोग किया जाता है. मिलेश पटेल ने बताया कि इस खेती में लगभग 3000 से 4000 रुपये का खर्च आता है और 25 डिसमिल जमीन से हर साल 40 से 50 हजार रुपये की कमाई हो जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि खेती के दौरान पत्ती छेदक और फूल में कालापन आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिनके लिए दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए.
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