कम बारिश में धान की जगह करें वैकल्पिक खेती, कृषि वैज्ञानिक ने बताया इसका विकल्प
कम बारिश में धान के अलावा करें वैकल्पिक खेती
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर घनश्याम साहू ने बताया कि सरगुजा का क्षेत्र हो या फिर बस्तर का वहां के किसान मुख्य रूप से धान ही लगाते हैं. पहले ऐसा भी था कि धान के अलावा दूसरे फसल भी किसान लिया करते थे. सरकार ने कई ऐसी योजनाएं लाई जिसकी वजह से किसान भर्री जमीन पर दलहन तिलहन ले सकते हैं.
पहले अविभाजित मध्यप्रदेश के समय छत्तीसगढ़ दलहन तिलहन के मामले में अग्रणी राज्य रहा है. लेकिन कृषि जोत कम होने के साथ-साथ भर्रीयो को खेतों के रूप में बनाना चालू कर दिए जिसकी वजह से दलहन और तिलहन का क्षेत्र कम हुआ.वर्तमान में साल 2025 -26 में देखेंगे तो 34.39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान लगाने का लक्ष्य रखा गया था. दलहन और तिलहन लगाने वाले किसान प्रधानमंत्री आशा योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 15 हजार रुपए दलहन तिलहन लगाने वाले किसानों को कृषि विभाग छत्तीसगढ़ शासन राज्य और केंद्र शासन के द्वारा यह योजना लाई गई है. जिसके माध्यम से किसान दलहन तिलहन लगा सकते हैं- घनश्याम साहू, कृषि वैज्ञानिक, IGKVV
किन फसलों की किसान कर सकते हैं खेती ?
दलहन तिलहन की मुख्य फसल जिसमें अरहर इसके अलावा मूंग और उड़द तिलहन की जब बात करते हैं. तब सोयाबीन और मूंगफली इसके साथ ही तिल और रामतिल की फसल को बहुत आसानी से किसान लगा सकते हैं. दलहन तिलहन की जो फसल है कम पानी चाहने वाली फसल है. इस बार जो अलनीनो की समस्या है उस हिसाब से किसानों को किसी भी हालत में दलहन तिलहन लगाना ही चाहिए. इसलिए कि यदि प्रदेश के किसान धान लगाते हैं और बारिश कम होती है तो प्रदेश के किसान बहुत ज्यादा परेशानी में पड़ जाएंगे.
खेती के लिए कैसी जमीन का करें चुनाव ?
दलहन, तिलहन उच्चवन जमीन में ऐसी जगह पर जहां बारिश अधिक होने पर पानी नहीं रुकना चाहिए. जुलाई अगस्त में ठीक-ठाक बारिश और सितंबर में हल्की बारिश होने पर भी किसान भाई आसानी से दलहन तिलहन लगा सकते हैं. अरहर की फसल को खेत की मेड़ों पर भी लगाया जा सकता है. मूंग, उड़द, सोयाबीन और मूंगफली को भर्री जमीन जो काली मिट्टी वाली हो जिस जगह पर पानी का जमाव नहीं होता. दलहन तिलहन लगाने के लिए एक बार जुताई करने के बाद लाइन शोइंग करते हैं तो 25 से 30 दिन बाद ही सोयाबीन को कीट नियंत्रण की आवश्यकता पड़ती है. उसके बाद सोयाबीन की फसल बहुत तेजी से ऊपर आ जाता है. वैसे ही तिल और रामतिल पानी नहीं रुकने वाली जगह पर आसानी से लगा सकते हैं.
साल 2021-22 में छत्तीसगढ़ में 30.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान लगाने का लक्ष्य
साल 2022-23 में 30.44 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में धान लगाने का लक्ष्य
साल 2023 -24 में 31 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में धान लगाने का लक्ष्य
साल 2024-25 में 33.90 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में धान लगाने का लक्ष्य
साल 2025 -26 में 34.39 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में धान लगाने का लक्ष्य
