नारायणपुर जिले के दुर्गम इलाके में पहली बार पहुंची बिजली भावुक हो गए ग्रामीण
छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल में बसे नारायणपुर जिले के ग्राम मोहन्दी और मसपुर के लोगों का बड़ा सपना साकार हो गया है। दशकों से लालटेन और ढिबरी की मद्धम रोशनी में जिंदगी गुजार रहे इन आदिवासी बाहुल्य गांवों में पहली बार बिजली का बल्ब जला तो ग्रामीणों की आंखें खुशी से छलक उठीं। राज्य सरकार की 'नियद नेल्लानार योजना' के कारण इन दुर्गम इलाकों में पहली बार बिजली पहुंची है।
दुर्गम राहें, दृढ़ संकल्प और सफलता
घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ग्राम मोहन्दी के मिचिंगपारा, कोडियारपारा व बीचपारा और ग्राम मसपुर के गुडरापारा तक बिजली पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के दृढ़ संकल्प ने इस सपने को साकार कर दिखाया है। अधिकारियों ने कहा कि कलेक्टर लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे थे।
परिवारों के जीवन में उजाला
वनांचल के इन गांवों को रोशन करने के लिए लाखों रुपये का खर्च आया। ग्राम मोहन्दी में लगभग 61.79 लाख रुपये की लागत से बिजली का विस्तार किया गया, जिससे 40 परिवारों को पहली बार बिजली का कनेक्शन मिला है। मसपुर गुडरापारा में 22.42 लाख रुपये की लागत से काम पूरा हुआ है। यहां 5 परिवारों के घरों को विद्युत कनेक्शन दिया गया है।
बदलेगी गांवों की तस्वीर
अधिकारियों ने कहा कि बिजली पहुंचने से वनांचल के इन गांवों में अब विकास की रफ्तार तेज होने वाली है। अब रात के अंधेरे में बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकेगी। बेहतर रोशनी मिलने से बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग, पंखे और अन्य आवश्यक बिजली उपकरणों के उपयोग से ग्रामीणों की दैनिक जीवनशैली बेहद सुगम हो गई है। बिजली की उपलब्धता से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों और जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरणों का संचालन अब बेहतर ढंग से हो सकेगा। ग्रामीणों में अब स्वरोजगार को लेकर नया उत्साह है। सिलाई, कुटीर उद्योग और छोटे व्यवसायों के शुरू होने से गांवों में आजीविका के नए साधन विकसित होंगे।
ग्रामीणों ने जताया आभार
वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अपने घरों को रोशनी से जगमगाता देख ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि यह बदलाव उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने शासन और प्रशासन का आभार जताया है।
