रैंप योजना के तहत लघु वनोपज और खाद्य प्रसंस्करण पर केंद्रित यह विशेष प्रशिक्षण, महिलाओं को मिल रहा रोजगार का रास्ता
जांजगीर- चांपा जिले में महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. भारत सरकार की रैंप योजना के तहत लघु वनोपज और खाद्य प्रसंस्करण पर केंद्रित यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल नई तकनीकों से परिचित करा रहा है.बल्कि स्वरोजगार और आय बढ़ाने के अवसर भी प्रदान कर रहा है. इस संबंध में रितेश सिरवानी, एनआईएमएसएमई हैदराबाद से रैंप योजना का कोऑर्डिनेटर हूं. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार की रैंप योजना के अंतर्गत CSIDC रायपुर के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है, यह तीन दिवसीय पूर्णतः निःशुल्क प्रशिक्षण है. जिसमें लघु वनोपज आधारित खाद्य प्रसंस्करण पर विशेष फोकस किया गया है.
रैंप योजना के तहत निःशुल्क प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षुओं से किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जा रही है.इस कार्यक्रम में आम, इमली, महुआ, हर्रा, बहेड़ा, चिरौंजी जैसे वनोपज से नए-नए उत्पाद बनाने की तकनीक सिखाई जा रही है. हम प्रतिभागियों को बता रहे हैं कि आम से अचार, जूस, पाउडर जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं.वहीं इमली से कैंडी, केचप और अन्य वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. इसी तरह आंवला से पाचक, पाउडर और हर्रा- बहेड़ा से त्रिफला तैयार करने की
लघु वनोपज से मिलेगा रोजगार
प्रशिक्षण में केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि मार्केटिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और आवश्यक सर्टिफिकेशन जैसे FSSAI रजिस्ट्रेशन के बारे में भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, साथ ही प्रतिभागियों का निःशुल्क उद्यम पंजीकरण भी किया जा रहा है, व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए पीएमपीजीई जैसी योजनाओं के तहत ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया भी समझाई जा रही है. इसमें कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बड़ी संख्या में भाग ले रही हैं. वही प्रशिक्षण ले रही महिलाओं का कहना है कि यह प्रशिक्षण उन्हें आत्मनिर्भर बनने, घर बैठे रोजगार शुरू करने और अपनी आय बढ़ाने में मदद करेगा. वही प्रशिक्षण के बाद सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए जाएंगे.
