फसलों और सब्जियों के लिए 'ब्रह्मास्त्र' देसी खाद
खेती करना भी इस बदलते युग में इतना आसान नहीं है, क्योंकि खेती में भी अब लागत बहुत ज्यादा लगती है, जिससे किसानों को फायदा कम मिलता है. इसे देखते हुए अब कुछ किसान रासायनिक खादों का इस्तेमाल कम कर रहे हैं, क्योंकि रासायनिक खाद काफी महंगे होते हैं. इस वजह से खेती में लागत बढ़ जाती है. ऐसे में जो किसान रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, उनके लिए ब्रह्मास्त्र बिल्कुल 'ब्रह्मास्त्र' ही साबित हो रहा है.राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत, निमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक घटकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इनमें 'ब्रह्मास्त्र' एक प्रभावी जैविक कीटनाशक है, जो फसलों में लगने वाले छोटे-बड़े कीटों को नियंत्रित करने में मदद करता है. कृषि में रासायनिक दवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच अब किसान तेजी से प्राकृतिक और जैविक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. इन्हीं विकल्पों में “ब्रह्मास्त्र” एक प्रभावी देसी कीटनाशक के रूप में उभरकर सामने आया है, जिसे किसान आसानी से घर पर तैयार कर सकते हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यह न केवल फसलों को हानिकारक कीटों से बचाता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर उत्पादन में भी सुधार करता है.
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में भी प्राकृतिक खेती की दिशा में किसानों के कदम लगातार बढ़ रहे हैं, इस क्रम में “ब्रह्मास्त्र” एक सशक्त और किफायती विकल्प बनकर सामने आया है, यह पूरी तरह प्राकृतिक मिश्रण है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित माना जाता है. जांजगीर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. केडी महंत बताते हैं कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत, निमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक घटकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इनमें ‘ब्रह्मास्त्र’ एक प्रभावी जैविक कीटनाशक है, जो फसलों में लगने वाले छोटे-बड़े कीटों को नियंत्रित करने में मदद करता है.
ऐसे करें ‘ब्रह्मास्त्र’ तैयार
‘ब्रह्मास्त्र’ एक तरल प्राकृतिक कीटनाशक है, जिसे देसी गाय के गोमूत्र और विभिन्न कड़वी पत्तियों से तैयार किया जाता है. इसमें नीम, करंज, सीताफल, बेल, अरंडी और धतूरा जैसी पत्तियां उपयोग में लाई जाती हैं, जो कीटों के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती हैं. इसे तैयार करने के लिए लगभग 10 लीटर गोमूत्र और 10 से 12 किलो मिश्रित कड़वी पत्तियों की आवश्यकता होती है. सभी पत्तियों को अच्छी तरह पीसकर मिट्टी के बर्तन में पानी के साथ उबाला जाता है 3 से 4 उबाल आने के बाद इसे ठंडा कर 2 से 3 दिनों तक छांव में रखा जाता है. इसके बाद इस मिश्रण को गोमूत्र में मिलाकर दोबारा हल्का उबाल दिया जाता है और 48 घंटे तक ढककर रखा जाता है, जिससे इसमें किण्वन प्रक्रिया पूरी हो जाती है और ब्रह्मास्त्र तैयार हो जाता है.
100 लीटर पानी में बस इतना डालें
तैयार ब्रह्मास्त्र का उपयोग 3 लीटर मात्रा को 100 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ फसल में छिड़काव के रूप में किया जाता है. इसका प्रयोग हर 15 दिन में किया जा सकता है. यह विशेष रूप से सुंडी, इल्ली, मैली बग और अन्य चिपकने वाले कीटों को नियंत्रित करने में कारगर होता है. हालांकि, इसके परिणाम तुरंत नहीं दिखते, लेकिन यह धीरे-धीरे कीटों को नियंत्रित कर फसलों की सुरक्षा करता है. गोमूत्र और कड़वी पत्तियों के कारण इसमें तीखापन और कड़वाहट बढ़ जाती है, जो इसे प्राकृतिक कीट प्रतिरोधक बनाता है. इस प्रकार, ब्रह्मास्त्र प्राकृतिक खेती के लिए एक सुरक्षित, सस्ता और प्रभावी उपाय है, जो न केवल फसलों की रक्षा करता है बल्कि मिट्टी और पर्यावरण को भी संरक्षित रखता है.
