गांव की पहल से बदली तकदीर, बम्बू राफ्टिंग से चमका तिरिया
बस्तर का तिरिया गांव छत्तीसगढ़ का एक मॉडल गांव बनकर उभरा है. यहां की सशक्त ग्राम सभा सामुदायिक नेतृत्व और संसाधन प्रबंधन की मिसाल पेश करती है. तिरिया गांव की प्राकृतिक खूबसूरती, आदिवासी जीवन शैली और बम्बू राफ्टिंग पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रही है. ग्राम सभा को मजबूत बनाने में ग्रामीणों की अहम भूमिका रही है. पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए 2021 में तिरिया को Rights and Resources Initiative (RRI) नामक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अपने 2025 Collective Action Awards में विश्व के टॉप 15 सम्मानजनक समुदायों में शामिल किया है.
कभी यह इलाका अत्यधिक माओवादी प्रभावित रहा यह इलाका बम्बू राफ्टिंग और सामुदायिक पर्यटन के लिए जाना जाता है. ग्रामीणों ने ग्राम सभा के माध्यम से अपने जल-जंगल-जमीन की रक्षा की और पर्यटन के जरिए आय का नया स्रोत भी विकसित किया. जगदलपुर जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूरी स्थित तिरिया गांव की आबादी करीब 420 है. ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2020 में गांव ने वन अधिकार कानून के तहत सामुदायिक दावा प्रस्तुत किया था. इसके बाद तिरिया को 3057.76 हेक्टेयर क्षेत्र पर सामुदायिक वन अधिकार पत्र मिला, जिससे जंगल की सुरक्षा और प्रबंधन की जिम्मेदारी ग्राम सभा को मिली. यहीं से गांव की तस्वीर तेजी से बदलने लगी.
ग्राम सभा की कोर टीम के सदस्य लखु राम नाग बताते हैं कि ग्राम सभा के तहत ग्रामीण जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए नियमित गश्त और निगरानी करते हैं. वन संसाधन अधिकार के लिए गांव ने लगभग छह माह तक संघर्ष किया, जिसके बाद अधिकार पत्र मिला. इसके पश्चात सामुदायिक वन प्रबंधन समिति का गठन किया गया और जंगल संरक्षण का काम संगठित तरीके से शुरू हुआ. अब पर्यटन गतिविधियों से भी गांव में रोजगार के अवसर बढ़े हैं. वन संसाधन अधिकार मिलने के शुरुआती दौर में लोगों को जोड़ना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन धीरे-धीरे पूरे गांव ने पहल को अपनाया.
वर्तमान में यहां बम्बू राफ्टिंग प्रमुख आकर्षण है, जबकि पर्यटन गार्डन का निर्माण जारी है. गांव में शराब पर रोक और प्लास्टिक प्रतिबंध भी लागू किया गया है. बम्बू राफ्टिंग का शुल्क 100 रुपये प्रति व्यक्ति है, जिससे प्रतिमाह लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक आय हो रही है.जंगल सुरक्षा के लिए 23-23 सदस्यों की टीमें बनाई गई हैं. ग्राम सभा अध्यक्ष जयराम नाग के अनुसार गांव में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है. पर्यटकों की सुरक्षा के लिए जोखिम वाले क्षेत्रों में समिति के सदस्य तैनात रहते हैं. बम्बू राफ्टिंग की पहल CFR के सहयोगियों के सुझाव पर शुरू की गई, जिससे गांव का पलायन रुका है. पहले ग्रामीण काम के लिए गोवा और आंध्र प्रदेश जाते थे, लेकिन अब गांव में ही रोजगार मिल रहा है. पर्यटकों के लिए पारंपरिक बस्तरिया भोजन जैसे चपड़ा चटनी, माड़िया पेज और बास्ता सब्जी की व्यवस्था भी की जाती है, जिसके लिए पूर्व ऑर्डर देना होता है.
