13 महीनों का होगा साल 2026, इस साल दो महीने का ज्येष्ठ मास, होली 10 दिन पहले और 17 दिन बाद मनेगी दिवाली - CGKIRAN

13 महीनों का होगा साल 2026, इस साल दो महीने का ज्येष्ठ मास, होली 10 दिन पहले और 17 दिन बाद मनेगी दिवाली

 


इस साल अधिमास के चलते पिछले साल से 10 दिन पहले और 16 से 19 दिनों बाद त्योहार पड़ेंगे। चार फरवरी से विवाह के लग्न शुरू होंगे। वहीं साल के राजा गुरु समन्वय बनाएंगे। 

हिंदी पंचांग के अनुसार 2026 अधिकमास वाला साल होगा। अधिकमास में आठ साल बाद दो ज्येष्ठ माह होंगे। जबकि पिछली बार अधिमास में दो सावन पड़े थे। इस तरह साल 2026 13 माह का होगा। इसमें पिछले साल की अपेक्षा ज्यादातर त्योहारों में बदलाव दिखेगा। इस साल शुरुआत के छह महीने में त्योहार पिछले साल से 10 दिन पहले पड़ेंगे और अगले छह महीने में त्योहार 16 से 19 दिन देर से पड़ेंगे। इसलिए इस बार होली 10 दिन पहले चार मार्च को पड़ेगी और दीपावली पिछले साल से 17 दिन देरी से यानी आठ नवंबर को मनाई जाएगी।

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार अधिकमास एक अतिरिक्त चंद्र माह होता है, जो हर तीन साल में सौर कैलेंडर में जोड़ा जाता है। जिस तरह अंग्रेजी कैलेंडर में लीप ईयर होता है, उसी तरह पंचांग में अधिकमास होता है। सौर वर्ष 365 दिन और चंद्र वर्ष 364 दिनों का होता है। ज्योतिष के आधार पर तीन वर्ष में चंद्र और सूर्य वर्ष के बीच आए इन्हीं 11 दिनों के अंतर को खत्म करने के लिए तीन साल में एक बार एक अधिकमास आता है।

क्यों लगता है अधिक मास?

हिंदी पंचांग के अनुसार, काल की गणना का आधार सूर्य और चंद्र बनते हैं. अर्थात इन्हीं के आधार पर काल की गणना की जाती है. जब सौर मास के 32 महीने पूर्ण होते हैं उस समय चंद्र मास के 33 महीने हो जाते हैं. सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में हर तीसरे साल एक माह का अंतर देखने को मिलता है. इस अंतर को समाप्त करने के लिए ऋषि-मुनियों ने अधिक मास की व्यवस्था की शुरुआत की थी. अधिक मास हर साल नहीं बल्कि तीसरे वर्ष में एक बार होता है. जिस संवत में अधिक मास होता है, वह साल 13 महीनों का होता है. अधिक मास हिंदी पंचांग और और ऋतुओं के बीच का तालमेल बनाए रखने के लिए जरूरी होता है.

अधिक मास में क्यों नहीं किए जाते ये काम?

हालांकि, अधिक मास को शुभ नहीं माना जाता है. मलिन होने के कराण इसे मलमास भी कहा जाता है. अधिक मास में शादी, मुंडन, गृह प्रवेश यज्ञोपवीत, नामकरण जैसे मांगलिक कामों का शुभारंभ नहीं किया जाता. जमीन, मकान खरीदी और नए कामों का भी इस अधिक मास में शुभारंभ नहीं किया जाता है.

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