सेमरा गांव में मनाई गई दीपावली, बना आकर्षण का केंद्र: हर त्योहार मनाया जाता है तारीख से पहले - CGKIRAN

सेमरा गांव में मनाई गई दीपावली, बना आकर्षण का केंद्र: हर त्योहार मनाया जाता है तारीख से पहले


 दीपावली हिन्दू त्योहारों में सबसे बड़ा पर्व है. इस बार 20 अक्टूबर को देशभर में दीपावली पर्व मनाया जाएगा. जहां पूरे देश में दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, वहीं धमतरी से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित सेमरा गांव में मंगलवार को ही धूमधाम से दीपावली मना ली गई। सदियों से चली आ रही इस अनोखी परंपरा में गांववाले हर त्यौहार को एक हफ्ता पहले ही मनाते हैं। चाहे वह होली हो, दशहरा या दीवाली। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि सदियों पहले गांव के देवता सिदार ने सपने में आदेश दिया था कि किसी भी त्यौहार को मनाने से पहले उन्हें हूम-धूप देना जरूरी है। इसी वजह से यहां आज भी हर त्यौहार निर्धारित तिथि से सात दिन पहले ही मनाया जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस परंपरा को तोड़ने से अनहोनी हो सकती है।

यह अनूठा दस्तूर अब सेमरा गांव की पहचान बन चुका है। त्योहार की तिथि से पहले ही उत्सव मनाए जाने की वजह से यह गांव आसपास के इलाकों में काफी मशहूर है। हर साल यहां त्योहार देखने और परंपरा का अनुभव करने दूर-दराज़ से लोग आते हैं। गांव का युवा वर्ग भी इस परंपरा को आस्था और पहचान से जोड़कर देखता है। उनका कहना है कि यह सिर्फ धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि परिवार और रिश्तेदारों को जोड़ने का अवसर भी है। त्योहार के बहाने उन्हें अपनों से मिलने और मेहमाननवाजी का मौका मिलता है। सेमरा गांव की यह परंपरा आस्था, संस्कृति और लोक जीवन की झलक पेश करती है, जो आज भी नई पीढ़ी द्वारा पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है।

क्यों एक हफ्ते पहले मनाई जाती है दिवाली 

 सेमरा में दिवाली मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है.इसके साथ ही कई किवदंतियां एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंची. कहते हैं कि गांव में सिरदार देव अखाड़ा खेलने आते थे. लेकिन एक बार सिरदार देव और उनका घोड़ा शेर के शिकार बन गए. इसके बाद सिरदार देव ने गांव के पुजारी (बैगा) को सपना दिया कि आप मुझे देवता के रूप में मानों, मेरी शर्तों पर कार्य करो. उनकी शर्त ये थी गांव में कोई भी त्यौहार एक सप्ताह पहले से ही शुरु करें. इस शर्त को जो नहीं मानेगा तो उसे अनहोनी का शिकार होना पड़ेगा. तब से गांव में एक सप्ताह पहले ही त्योहार मनाया जाने लगा है.

आप इसे भले ही अंधविश्वास का नाम दें लेकिन सेमरा के लोगों के लिए ये आस्था है. सेमरा गांव में दीपावली पर्व के एक हफ्ता पहले ही हर घर में रंग रोगन, रंगोलियां और जगमगाते झालर सज जाते हैं.लोगों के लिए भले ही ये अंधविश्वास हो लेकिन सेमरा वासियों के लिए ये सिरदार देव के प्रति गहरी आस्था है.

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