पारंपरिक खेती छोड़ नवाचार की राह पर बढ़े किसान,अदरक और अरहर की खेती से संवर रही आजीविका
छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर में खेती में नवाचार और फसल विविधीकरण अपनाकर किसान अपनी आजीविका को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम दरिमा के किसान की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है. वर्षों से धान की खेती करने वाले किसान ने इस खरीफ सीजन में कृषि विभाग के मार्गदर्शन से खेती का तरीका बदला है. उन्होंने धान के स्थान पर लगभग डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती की है और खेतों की मेड़ों पर अरहर लगाई है. वर्तमान में उनकी फसल अच्छी स्थिति में है, जिससे वे उत्साहित हैं और मोटी कमाई कि संभावना है.
किसान ने बताया कि खरीफ फसल की बुआई से पहले वे दरिमा समिति पहुंचे थे. वहां उपस्थित कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें धान के स्थान पर अन्य फसलों की खेती करने के फायदे बताए अधिकारियों ने अरहर, तिलहन सहित वैकल्पिक फसलों की खेती और फसल विविधीकरण के लिए शासन द्वारा कृषक उन्नति योजना दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि की जानकारी दी. किसान ने बताया कि अधिकारियों से मिली जानकारी और मार्गदर्शन के बाद उन्होंने अपने खेत में इस वर्ष कुछ अलग करने का निर्णय लिया. पिछले वर्ष जिस भूमि पर धान की खेती की थी, वहां इस बार अदरक की फसल लगाई. इसके साथ ही खेतों की मेड़ों का उपयोग अरहर की खेती के लिए किया, जिससे उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग हो सके.
किसान ने लगभग डेढ़ एकड़ रकबे में अदरक की खेती की है. इसके साथ खेतों की मेड़ों पर कृषि विभाग से प्राप्त अरहर के बीज लगाए हैं. इस तरह उन्होंने एक ही खेत में मुख्य फसल के साथ मेड़ों पर दूसरी फसल उगाने की पहल की है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में अदरक और अरहर की फसल अच्छी स्थिति में है. खेत में फसलों की बढ़वार देखकर उन्हें संतोष हो रहा है. पहले वे इस रकबे में धान की खेती करते थे, लेकिन इस वर्ष वैकल्पिक फसल अपनाकर खेती में नया प्रयोग किया है. उन्हें उम्मीद है कि अदरक के उत्पादन के साथ मेड़ों पर लगी अरहर से भी अतिरिक्त उपज प्राप्त होगी.
किसान ने बताया कि दरिमा समिति में कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान के स्थान पर निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी दी थी. इसी जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने फसल विविधीकरण अपनाया है. उन्होंने कहा कि शासन की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता किसानों को पारंपरिक खेती के साथ अन्य फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है.
अपना अनुभव साझा करते हुए किसान ने बताया कि पिछले वर्ष इस खेत में धान लगाया था. इस वर्ष कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह पर लगभग डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती की है और मेड़ों पर अरहर लगाई है. अरहर के बीज भी कृषि विभाग से मिले हैं. अभी मेरी फसल बहुत अच्छी है. अधिकारियों ने बताया था कि धान के बदले दूसरी फसल लगाने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी. वो अपनी खेती से बहुत खुश हैं.
कृषि विभाग द्वारा किसानों को धान के अतिरिक्त दलहन, तिलहन एवं अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. फसल विविधीकरण से किसानों को अपनी भूमि और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप विभिन्न फसलों का उत्पादन करने के अवसर मिलते हैं. साथ ही एक ही फसल पर निर्भरता कम करने और आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं. ग्राम दरिमा के किसान ने कृषि विभाग की सलाह पर अदरक और अरहर की खेती अपनाकर इसी दिशा में पहल की है.
