महुआ और रागी लड्डू से आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं
ग्राम पंचायत कारली की रहने वाली श्रीमती चंदा नाग ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई है। वर्ष 2021 में प्रगति स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने महुआ लड्डू और रागी से बने उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका को मजबूत किया। आज इन्हीं गतिविधियों से वह सालाना करीब 5 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
चंदा नाग बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले वह छोटा-सा किराना दुकान चलाती थीं। उनकी दुकान पर स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं आती थीं। उनसे समूह की गतिविधियों और आजीविका के अवसरों की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने भी समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने महुआ लड्डू और रागी के विभिन्न उत्पाद बनाना शुरू किया। उनका पहला स्टॉल जवांगा स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम में लगा, जहां महुआ लड्डू और रागी उत्पादों की बिक्री से करीब 3 हजार रुपये की आमदनी हुई। इसके बाद उन्हें अलग-अलग आयोजनों में स्टॉल लगाने के अवसर मिलते रहे। मेहनत, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और बाजार से जुड़ाव के चलते उनकी आमदनी लगातार बढ़ती गई और आज वह सालाना करीब 5 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
महुआ और रागी जैसे स्थानीय उत्पादों से अपनी आजीविका को नई दिशा देने वाली चंदा नाग की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायी है। स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि स्थानीय संसाधनों को आजीविका का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश की है। रक्षाबंधन पर मुख्यमंत्री को राखी बांधने की उनकी इच्छा इस कहानी में आत्मीयता और अपनत्व का एक भावनात्मक पहलू जोड़ती है।
