थम गई पंडवानी की अमर आवाज़, तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर दिलाई पहचान
पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी की महान साधिका तीजन बाई के निधन के साथ छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मान से अलंकृत तीजन बाई का आज सुबह लगभग 3:15 बजे रायपुर एम्स में निधन हो गया. देर रात सीएम विष्णु देव साय ने तीजन बाई के परिजनों से फोन पर बात कर उनके स्वास्थ्य का हाल चाल लिया था.तीजन बाई ने अपनी अनूठी गायन शैली और प्रभावशाली प्रस्तुति से पंडवानी लोकगाथा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया. महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार आवाज, अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत करने वाली तीजन बाई ने देश-विदेश में हजारों प्रस्तुतियां देकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति का गौरव बढ़ाया.
विदेशों में लहराया पंडवानी का परचम
पंडवानी में दुशासन वध के प्रसंग पर तीजन बाई का प्रदर्शन दुनियाभर में लोकप्रिय हुआ. 1980 में तीजन बाई ने सांस्कृतिक राजदूत के रूप में इंग्लैंड, फ्रांस, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, टर्की, माल्टा, साइप्रस, रोमानिया और मॉरीशस की यात्रा भी की.
तीजनबाई को मिले हैं कई पुरस्कार
तीजन बाई को साल 1988 में पद्मश्री सम्मान मिला. 1995 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 2003 में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से अलंकृत की गईं. 2007 में उन्हें नृत्य शिरोमणि से भी सम्मानित किया गया. 2017 में खैरागढ़ संगीत विवि से डी लिट की मानद उपाधि दी गई. साल 2019 में पद्म विभूषण से उन्हें सम्मानित किया गया. तीजनबाई को 4 डी लिट उपाधी मिले, साथ ही उन्हें जापान में फुकोका पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.
पीएम ने जताया शोक
पीएम ने अपने शोक संदेश में लिखा, ''सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई. उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं.''
सीएम साय पहुंचे रायपुर एम्स
तीजन बाई के निधन की खबर मिलते ही सीएम विष्णु देव साय रायपुर एम्स पहुंचे. सीएम ने अपने शोक संदेश में कहा, ''छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर गाथाकार, पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी कलाकार डॉ. तीजन बाई जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है. उनका निधन न केवल लोककला जगत के लिए, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ तथा समस्त देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति है. अपने अद्वितीय गायन शैली, विलक्षण प्रतिभा और लोक परंपराओं के संरक्षण के माध्यम से उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया. उनका अतुलनीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा. प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकसंतप्त परिजनों, असंख्य प्रशंसकों और समस्त लोककला जगत को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें,''
