छत्तीसगढ़ में विकास का नया रोडमैप: बस्तर बनेगा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का बड़ा केंद्र, जिलों के लिए तैयार होगा अलग आर्थिक मॉडल
छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 के समापन पर एक्सपर्ट ने पर्यटन, कृषि, टेक्निक और विकास नीति से जुड़े कई जरूरी सुझाव दिए. इस शिविर में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के संतुलित विकास और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया. बस्तर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए. यहां की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक विरासत को देखते हुए इसे एक मेजर टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाया जा सकता है. इसके लिए बेहतर रोड, होटल और अन्य सुविधाओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी भी जरूरी बताई गई.
इसके साथ ही यह भी बताया गया कि हर जिले की आर्थिक क्षमता के आधार पर अलग-अलग विकास योजनाएं बनाई जाएं. यानी हर जिले की जरूरत और संसाधनों के अनुसार ही विकास की दिशा फाइनल हो. इससे विकास ज्यादा असरदार और संतुलित हो सकेगा.
AI के इस्तेमाल पर भी जोर
सरकारी कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया. एआई के इस्तेमाल से सरकारी सेवाएं तेज, पारदर्शी और आसान बन सकती हैं. इसके साथ ही नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई, जिससे किसानों की आमदनी बढ़े और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब सिर्फ विचार-विमर्श का मंच नहीं रहा है, बल्कि यह शासन सुधार का एक मजबूत जरिया बन चुका है. उन्होंने बताया कि पिछले शिविरों के सुझावों के आधार पर ई-ऑफिस सिस्टम लागू किया गया. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू की गई और सेवा सेतु के जरिए 36 विभागों की 520 से ज्यादा सर्विसेज ऑनलाइन दी गईं.
नीति और प्रशासनिक फैसले शामिल
उन्होंने यह भी कहा कि इस बार के चिंतन शिविर में मिले सुझावों को भी जल्द ही नीतियों और प्रशासनिक फैसलों में शामिल किया जाएगा. इस कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि बस्तर अपनी प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत के कारण एक टूरिस्ट स्पॉट बन सकता है, जहां कम पर्यावरणीय नुकसान हो और पर्यटन से स्थानीय लोगों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले. इसके लिए जिम्मेदार पर्यटन मॉडल अपनाने की जरूरत बताई गई. इसके अलावा, सबका प्रयास के जरिए विकास आधारित राजनीति और जिलेवार जीडीपी मॉडल पर भी विचार किया गया, ताकि हर जिले का विकास उसके वास्तविक प्रदर्शन और क्षमता के आधार पर हो सके.
