बढ़ता पारा बना रहा शारीरिक निष्क्रियता और 'आलसी', डायबिटीज-हार्टअटैक के केस बढ़ने का खतरा
बढ़ती गर्मी और उमस के कारण बाहर निकलना लगभग असंभव होता जा रहा है. ऐसे में जो लोग पार्क में टहलते थे, रनिंग करते थे, साइकिल चलाते थे या किसी भी प्रकार की फिजिकल एक्टिविटी के लिए घर से बाहर निकलते थे, उनके पास विकल्प कम होते जा रहे हैं. शहरों में बढ़ते 'कंक्रीट के जंगल' और कम होते पेड़ों ने इस स्थिति को और बिगाड़ दिया है. साल दर साल धरती का क्लामेट बैलेंस बिगड़ता जा रहा है. बेमौसम बरसात, ओले गिरना, बर्फबारी, भीषण गर्मी और सर्दी के रूप में ये जलवायु परिवर्तन साफ-साफ देखने को मिल रहा है. इसके कारण चाहे जो हों लेकिन, इसका असर लोगों की जीवनशैली पर पड़ रहा है. पारा चढ़ने के कारण गर्मी और गर्म दिनों में हो रहा इजाफा लोगों की शारीरिक निष्क्रियता बढ़ा रहा है. इसके चलते डायबिटीज-हार्टअटैक के मामले जहां बढ़ रहे हैं वहीं, सडेन डेथ यानी अचानक मौत के मामलों में भी वृद्धि देखने को मिल रही है.
भारत में यह स्थिति और काफी गंभीर है. अनुमान है कि 2050 तक भारत में फिजिकल इनएक्टिविटी में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी. लोग गर्मी के डर से बाहर निकलना, टहलना या एक्सरसाइज करना कम कर देंगे. यानी आलसी होने की प्रवृत्ति बढ़ेगी. जो लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ा देगा.
जलवायु परिवर्तन के कारण औद्योगिक क्रांति (1850-1900) के बाद से धरती का औसत तापमान लगभग 1.42 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है. हाल के वर्षों (2015-2024) में यह वृद्धि तेज हुई है. 2024 में वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.55 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो गया. जो अब तक का सबसे गर्म दशक रहा है. वर्तमान में धरती का तापमान 0.25 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक की दर से बढ़ रहा है.
साल 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया. इसके चलते समुद्र के तापमान में भी धरती की तुलना में दोगुनी की वृद्धि देखने को मिली है. दरअसल, वैश्विक तापन से पैदा होने वाली लगभग 90% गर्मी समुद्र सोख लेता है, जिससे उसके तापमान में वृद्धि हो जाती है. यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी दर से जारी रहता है, तो 21वीं सदी के अंत तक तापमान में 2.6 से 4.8 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है.
एक्सरसाइज में कमी देती है बड़ी-बड़ी बीमारियां: रिपोर्ट में कहा गया है कि फिजिकली जो लोग एक्टिव नहीं होते उन्हें गैर-संचारी रोग होने का खतरा ज्यादा रहता है. गर्मी बढ़ने से एक्सरसाइज करने की प्रवृत्ति में आ रही कमी से हार्ट डिजीज, टाइप-2 डायबिटीज, कैंसर और मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं.
बचाव का क्या है रास्ता: सर्वे रिपोर्ट में बचाव के उपाय भी बताए गए हैं. कहा गया है कि फिजिकल इनएक्टिविटी से बचने के लिए एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करना ही होगा. इसके साथ ही शहरों को ठंडा बनाने के लिए छायादार रास्ते, अर्बन फॉरेस्ट और सार्वजनिक स्थानों पर कूलिंग सेंटर्स की व्यवस्था भी सरकारी संस्थानों को करना होगा. जिम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को किफायती बनाना होगा, ताकि ये आम आदमी की पहुंच में हों.
एक्सरसाइज को लेकर क्या है WHO की गाइडलाइन: एक्सरसाइज को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO के अनुसार 18 से 64 साल के लोगों को प्रति दिन 10 से 21 मिनट तक खूब पसीना बहाने वाले व्यायाम करने चाहिए. लेकिन, बढ़ती गर्मी के कारण फिजिकल इनएक्टिविटी बढ़ने से हर तीसरा व्यक्ति इस गाइडलाइन को पूरा नहीं कर पा रहा.
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