अब बेखौफ घूमिए बस्तर, लाल आतंक से आजादी के बाद बना नया टूरिज्म हॉटस्पॉट
छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका कभी नक्सली हिंसा की वजह से डर और असुरक्षा का दूसरा नाम था। लेकिन, अब सरकार की कोशिशें रंग ला रही हैं। बस्तर तेज़ी से टूरिज़्म के एक नए दौर में कदम रख रहा है। सुरक्षा हालात में काफी सुधार, सड़कों और मोबाइल कनेक्टिविटी के विस्तार और सरकार की विकास योजनाओं ने इस इलाके की नेगेटिव इमेज को बदल दिया है। आज बस्तर न सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और अनोखी आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है, बल्कि यह एडवेंचर एक्टिविटीज़, इको-टूरिज़्म और ग्रामीण टूरिज़्म के एक नए हब के तौर पर भी उभर रहा है। छत्तीसगढ़ के बस्तर अब पूरी तरह नक्सल मुक्त है और पर्यटकों के लिए सुरक्षित है. बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती, आदिवासी संस्कृति और आकर्षक पर्यटन स्थल देश के विभिन्न राज्यों से लोगों को खींच रहे हैं.i अगर आप नए साल का जश्न मनाने और घूमने का प्लान कर रहे हैं, तो सीधे बस्तर आइए. अब बस्तर में लाल आतंक का डर नहीं रहा. यहां आपको मिलेगा खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य, आदिवासी संस्कृति और परंपराएं, जो हर पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. देश और विदेश से आने वाले पर्यटक बस्तर में प्रशासनिक अधिकारियों के स्वागत का अनुभव भी कर रहे हैं. चित्रकोट, तीरथगढ़ जलप्रपात और धूमड़ा रास जैसे स्थल विश्व मानचित्र की तरह अद्भुत हैं. यहां आप कायकिंग और बंबूरफ्टिंग का रोमांच भी ले सकते हैं.
पहली बार ऐसा हो रहा है कि नए साल मनाने के लिए पर्यटक मनाली, कश्मीर या गोवा जैसी जगहों को छोड़कर सीधे आदिवासी इलाकों की ओर आ रहे हैं. बस्तर अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है, और लोग यहां बेखौफ होकर घूम रहे हैं. तो इस नए साल डर और चिंता को पीछे छोड़कर बस्तर की यात्रा कीजिए. यहां आपको न सिर्फ रोमांच और मनोरंजन मिलेगा, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपरा के अद्भुत रंगों का भी अनुभव होगा. बस्तर आकर आप पाएंगे कि कैसे यह क्षेत्र अब पर्यटन और शांति का नया केंद्र बन गया है.
पर्यटक कह रहे हैं कि बस्तर अब खुले मन और खुले दिल से अपनी आज़ादी की सांस ले रहा है. यहां प्रकृति ने सब कुछ दिया है और हम दूर-दराज से इसे देखने आए हैं. तो इस नए साल, डर को पीछे छोड़िए और बस्तर की खूबसूरती, संस्कृति और परंपरा का आनंद लीजिए.
सुरक्षा ने बदल दिया पूरा माहौल
जो रास्ते कभी खतरनाक माने जाते थे, अब वे पर्यटकों के लिए यात्रा करने के लिए सुरक्षित हैं। कम्युनिकेशन नेटवर्क के विस्तार, मोबाइल टावरों की संख्या में बढ़ोतरी और बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी ने बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ दिया है। इन कोशिशों से ऐसा सुरक्षित माहौल बना है कि पर्यटक अब बिना किसी डर के उन इलाकों में भी जा रहे हैं जिन्हें पहले संवेदनशील माना जाता था, जैसे चित्रकूट, तीरथगढ़, कुटुमसर गुफा, बारसूर और अबूझमाड़। यह बदलाव सिर्फ़ सुरक्षा में सुधार नहीं है; यह बस्तर में टूरिज्म के भविष्य की नींव है।
पंडुम कैफे: स्थानीय संस्कृति और स्वाद का एक नया केंद्र
बस्तर में 'पंडुम कैफे' का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 17 नवंबर, 2025 को किया। यह कैफे बस्तर में शांति और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अनोखे कैफे का मुख्य उद्देश्य नक्सली हिंसा के पीड़ितों और आत्मसमर्पण करके मुख्यधारा में लौटे पूर्व माओवादियों को सम्मानजनक आजीविका और पुनर्वास के अवसर प्रदान करना है।
जगदलपुर के पूना नारकोम कॉम्प्लेक्स में स्थित, यह कैफे स्थानीय युवाओं द्वारा प्रबंधित और संचालित किया जाता है, जिसमें पूर्व नक्सली और नक्सली हिंसा के पीड़ित दोनों शामिल हैं। "जहां हर कप एक कहानी कहता है" टैगलाइन के साथ, यह कैफे संघर्ष पर जीत, साहस और एक नई शुरुआत का प्रतीक है।
छत्तीसगढ़ होमस्टे पॉलिसी 2025-30 ग्रामीण पर्यटन की नई गति
छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'छत्तीसगढ़ होमस्टे पॉलिसी 2025-30' का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, और अब इसे लागू किया जा रहा है। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य बस्तर और सरगुजा जैसे प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर आदिवासी इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा करना है। यह पॉलिसी प्राइवेट घर मालिकों को अपनी प्रॉपर्टी का कुछ हिस्सा सीमित समय के लिए पर्यटकों को किराए पर देकर अतिरिक्त इनकम कमाने का मौका देती है, जिससे 'वोकल फॉर लोकल' पहल को भी मज़बूती मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका बस्तर
बस्तर जिले में स्थित धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) ने अपने बेस्ट टूरिज्म विलेजेज अपग्रेडेशन प्रोग्राम के लिए चुना है, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। इस चुनाव की घोषणा नवंबर 2024 में की गई थी। धुरमरास गांव बस्तर के मशहूर कांगेर वैली नेशनल पार्क के घने जंगलों में स्थित है। यह गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता और समुदाय-आधारित इको-टूरिज्म गतिविधियों के लिए जाना जाता है। पर्यटक बांस राफ्टिंग, कयाकिंग, ट्रेकिंग, पक्षी देखना और स्थानीय होमस्टे में रहने जैसी गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं, जिससे उन्हें ग्रामीण और आदिवासी जीवन का असली अनुभव मिलता है।
