गांव की महिलाओं ने महुआ को बनाया कमाई का जरिया, बेच दिया लाखो का अचार
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में महिला स्वयं सहायता समूहों ने परंपरागत महुआ को आधुनिक रूप देकर आजीविका का मजबूत साधन बना लिया है. अब महुआ केवल जंगल में गिरने वाला फल नहीं बल्कि अचार के रूप में घर-घर पहुंचने वाला उत्पाद बन चुका है. बड़भूम क्षेत्र में संचालित यह पहल न केवल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ा रही है बल्कि महुआ जैसे पारंपरिक वन उत्पाद के संरक्षण का भी उदाहरण बन गई है. जिला यूनियन बालोद के उप प्रबंध संचालक मधुसूदन डोंगरे ने लोकल 18 से कहा कि महुआ का अचार तैयार करने के लिए पहले से सुव्यवस्थित योजना बनानी होती है.
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में महुआ संग्रह के दो प्रमुख तरीके हैं. पहला परंपरागत तरीका, जिसमें ग्रामीण नीचे गिरे हुए महुआ को उठा लेते हैं. यह तरीका आसान जरूर है लेकिन इसमें धूल, मिट्टी और कंकड़ मिल जाने के कारण यह महुआ खाने योग्य नहीं रहता और अचार बनाने के काम में नहीं आता. दूसरा तरीका वैज्ञानिक और स्वच्छ है. इसमें महुआ पेड़ के चारों ओर जाली बांधी जाती है, जिससे गिरने वाले फूल सीधे जाली में इकट्ठा हो जाते हैं. इस तरह महुआ स्वच्छ अवस्था में संग्रहित किया जा सकता है. एकत्रित महुआ को फिर नेचुरल ड्राइंग सिस्टम के जरिए सुखाया जाता है. ड्रायर के नीचे एक प्लेट रहती है, जो चारों ओर से कवर्ड होती है ताकि धूल या कीड़े-मकोड़ों से सुरक्षा बनी रहे.
उन्होंने आगे कहा कि संग्रह के समय महुआ पीले रंग का होता है लेकिन सूखने के बाद उसका रंग बदलकर हल्का भूरा हो जाता है. सुखाने के बाद उसमें मौजूद परागकणों की सफाई की जाती है और फिर इसे कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रख दिया जाता है. जब अचार बनाने की जरूरत होती है, तब यही संग्रहित महुआ प्रयोग में लाया जाता है. बाजार में कच्चे महुआ की कीमत लगभग ₹150 प्रति किलो है जबकि प्रोसेस किए गए अचार की कीमत इससे कहीं अधिक है. बड़भूम क्षेत्र के महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य पिछले दो साल से महुआ का अचार तैयार कर रही हैं. अब तक लगभग 12 लाख रुपये मूल्य का महुआ अचार तैयार कर सप्लाई किया जा चुका है. इसमें लागत और मजदूरी घटाने के बाद महिलाओं को लगभग 4 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को स्थायी रोजगार का अवसर मिला है.
महुआ अचार के दाम
महुआ का अचार स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभदायक माना जा रहा है. इसमें प्राकृतिक एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व होते हैं, जो खून की सफाई करते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. महुआ अचार को सामान्य तापमान में एक साल तक और कोल्ड स्टोरेज में दो साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है. वर्तमान में यह अचार बाजार में 450 ग्राम पैक 235 रुपये और 250 ग्राम पैक 150 रुपये में उपलब्ध है जबकि प्रति किलो की कीमत लगभग ₹450 है. इस प्रकार महुआ का अचार न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है बल्कि छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों को राज्य से बाहर पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है.
