दण्डक ब्रांड से बाजार में पहचान बनाएंगे दंतेवाड़ा के जैविक उत्पाद, आत्मनिर्भर बनेंगी महिला समूहों की दीदियां - CGKIRAN

दण्डक ब्रांड से बाजार में पहचान बनाएंगे दंतेवाड़ा के जैविक उत्पाद, आत्मनिर्भर बनेंगी महिला समूहों की दीदियां


जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने, स्थानीय कृषि उत्पादों को बाजार से जोड़ने और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत माँ दंतेश्वरी महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की ‘दण्डक ब्रांड’ दुकान का शुभारंभ आज चितालंका में किया गया। इस पहल से स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

दुकान का शुभारंभ विधायक श्री चैतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी, जनपद पंचायत कुआकोंडा अध्यक्ष श्री सुकालू मुड़ामी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने किया। दुकान के माध्यम से नीमफूल, एचएमटी चावल, बासमती चावल, लालचुड़ी चावल, अमचूर, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी और रागी जैसे स्थानीय उत्पादों को दण्डक ब्रांड के नाम से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन के माध्यम से उनकी गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

विधायक श्री चैतराम अटामी ने कहा कि पहले जैविक खेती को लेकर केवल चर्चा होती थी, लेकिन अब इसे व्यवस्थित व्यवसाय से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। स्व-सहायता समूहों की दीदियां उत्पादन के साथ पैकेजिंग, बिक्री और विपणन में भी भागीदारी निभाएंगी। इससे किसानों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को पर्यटकों और व्यापक बाजारों तक पहुंचाने के लिए गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और नियमित आपूर्ति पर ध्यान देना जरूरी है।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी ने कहा कि जैविक खेती की यह पहल भविष्य में बड़े अवसरों का आधार बन सकती है। लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होकर शुद्ध और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए जैविक खेती को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इससे उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ मिलेंगे और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

माँ दंतेश्वरी महिला एफपीओ से जुड़े लगभग 60 उत्पादक समूहों की 2,500 महिला सदस्यों को इस पहल से लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय उत्पादों को व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराने से ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आय के नए अवसर सृजित होंगे। इनमें एचएमटी और बासमती चावल की कीमत 75 रुपये प्रति किलो, नीमफूल चावल की कीमत 70 रुपये प्रति किलो, लालचुड़ी चावल की कीमत 68 रुपये प्रति किलो तथा चिकला चावल की कीमत 65 रुपये प्रति किलो निर्धारित है। इस प्रकार इनमें एचएमटी और बासमती चावल के 10-10 किलो की कीमत 750-750 रुपये, नीमफूल के 10 किलो की कीमत 700 रुपये, लालचुड़ी के 10 किलो की कीमत 680 रुपये और चिकला के 10 किलो की कीमत 650 रुपये है। इस प्रकार पांचों किस्मों के कुल 50 किलो चावल की कीमत 3,530 रुपये होती है। 

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