छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के गिधवा-परसदा पक्षी विहार में पहुंचने लगे दुर्लभ प्रवासी पक्षी, गुलाबी ठंड के साथ बढ़ी रौनक
छत्तीसगढ़ में गुलाबी ठंड की आहट के साथ ही प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। बेमेतरा जिले के गिधवा-परसदा पक्षी विहार में मंगलवार सुबह चैता (गैरगिनी) और दुर्लभ नकटा बत्तख दिखाई दीं। पक्षियों की मौजूदगी से क्षेत्र में एक बार फिर रौनक बढ़ने लगी है। पक्षी मित्र जयंत जायसवाल ने इन पक्षियों की तस्वीरें कैमरे में कैद कीं। कमल-कुमुदनी से भरे उथले जलक्षेत्र में विचरण करते पक्षियों की मौजूदगी इस क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गिधवा-परसदा पक्षी विहार में देखी गई चैता बत्तख शीतकाल के दौरान यूरोप तथा मध्य एशिया के सुदूर क्षेत्रों से लंबी उड़ान भरकर यहां पहुंचती है। इस पक्षी के शरीर पर सुंदर भूरे रंग के धब्बे और आंख के पास स्पष्ट काली लकीर होती है, जो इसे अलग पहचान देती है। यह पक्षी उथले पानी में जलीय वनस्पतियों के बीच अपना आहार खोजता है। दूसरी ओर, आकर्षक नकटा बत्तख भी अपनी अनूठी शारीरिक बनावट से पक्षी प्रेमियों का मन मोह लेती है। इसके सिर पर उकेरे हुए काले धब्बों के साथ सफेद रंग दिखाई देता है, जबकि नर पक्षी की चोंच के ऊपर एक विशिष्ट उभरी हुई गांठ होती है। यह पक्षी प्राकृतिक रूप से वृक्षों के कोटरों में अपना घोंसला निर्मित करता है।
नकटा बत्तख भी अपनी विशिष्ट बनावट के कारण पक्षी प्रेमियों का ध्यान आकर्षित करती है। इसके सिर पर सफेद रंग के साथ काले धब्बे दिखाई देते हैं, जबकि नर की चोंच पर उभरी हुई गांठ इसकी प्रमुख पहचान है। यह प्रजाति पेड़ों के खोखलों में घोंसला बनाती है। पक्षी विहार में इन दोनों प्रजातियों की मौजूदगी यहां के अनुकूल प्राकृतिक आवास और आर्द्रभूमि के महत्व को दर्शाती है।
नवागढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला गिधवा-परसदा क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के प्रवास के लिए बेहद सुरक्षित और महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। शीतकालीन मौसम में इस क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के लगभग 200 से भी अधिक प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। हालांकि, पूर्व के वर्षों में जल संकट पैदा होने के कारण पक्षियों के आगमन पर असर पड़ा था। इस पक्षी विहार के 10 किलोमीटर के दायरे में 10 से अधिक छोटे-छोटे जलाशय मौजूद हैं। यदि इन सभी जलाशयों में नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने, प्राकृतिक वनस्पतियों को सुरक्षित रखने और सघन पौधरोपण करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए, तो यह पूरा क्षेत्र पक्षियों के लिए एक आदर्श प्राकृतिक आवास बन सकता
गिधवा-परसदा पक्षी विहार में हर साल आने वाले प्रवासी पक्षी क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा का अहम हिस्सा हैं। इनके संरक्षण के लिए जलाशयों में पानी की उपलब्धता बनाए रखना, जलीय वनस्पतियों को सुरक्षित रखना और आसपास के पर्यावरण का संतुलन कायम करना जरूरी है।पक्षियों के अनुकूल वातावरण विकसित होने से न केवल उनकी मौजूदगी बनी रहेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में गिधवा-परसदा के विकास के लिए पर्यटन सुविधाओं के साथ जल संरक्षण को भी प्राथमिकता देना जरूरी होगा।
गिधवा-परसदा में हर साल दिसंबर से अप्रैल महीने के दौरान पक्षी प्रेमियों, पर्यटकों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की भारी चहल-पहल बनी रहती है। पिछले वर्ष दूसरे राज्यों से पहुंचे कई पर्यटकों ने इस प्राकृतिक क्षेत्र में रात्रि विश्राम भी किया था। पक्षियों की अद्भुत विविधता और समृद्ध आर्द्रभूमि इस स्थान को पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत आकर्षक बनाती हैं। यदि जलाशयों के जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो गिधवा-परसदा को एक प्रमुख राज्यस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में उभारा जा सकता है। इससे प्राकृतिक पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
