75 दिनों तक गूंजेगी बस्तर की संस्कृति, 1.21 करोड़ के बजट से होगी भव्य तैयारी, यूनेस्को सूची पर भी फोकस
विश्वप्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा-2026 को भव्यता के साथ मनाने और इसे यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने की तैयारियों को गति दी गई है। बस्तर दशहरा समिति की समीक्षा बैठक में पर्व के सफल संचालन के लिए 1.21 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट रखा गया है।
बस्तर सांसद एवं समिति अध्यक्ष महेश कश्यप की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा, माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव, मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन तथा टेंपल स्टेट समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया। सांसद कश्यप ने बस्तर दशहरा को सामाजिक समरसता और अनूठी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई है। सांसद ने एनएमडीसी प्रबंधन से सीएसआर मद के अंतर्गत हर वर्ष कम से कम 1.5 करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय मदद दिलाने की मांग उठाने की बात कही। उन्होंने निर्देश दिया कि 75 दिनों के इस आयोजन के दौरान कोई भी समानांतर कार्यक्रम न किया जाए, जिससे पर्व की मूल परंपरा प्रभावित न हो।
कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने बस्तर दशहरा को शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न कराने के लिए की जा रही प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी दी। विभागों के बीच बेहतर समन्वय, सुरक्षा, यातायात और आयोजन स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा की गई। जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना समेत संबंधित विभागों के अधिकारी बैठक में मौजूद रहे।
माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1423 से निरंतर आयोजित हो रही यह परंपरा मैसूर तथा कुल्लू दशहरा से भी अधिक प्राचीन है। उन्होंने इस पर्व को यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक धरोहर सूची में दर्ज कराने का सामूहिक संकल्प दोहराया। उन्होंने मावली परघाव के स्थान और मार्ग की विशेष सफाई कराने तथा देवी-देवताओं व आंगा देव के सम्मानपूर्वक आगमन की व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने मांझी-चालकी से पारंपरिक वेशभूषा और पगड़ी पहनने का अनुरोध किया।
बैठक के अंत में नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने देवसराय समेत अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में श्रद्धालुओं के साथ-साथ देवी-देवताओं से जुड़े पारंपरिक आयोजनों को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए जरूरी व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए।