आस्था एंव संस्कृति के पारंम्परिक रंगों से सजता है कोण्डागांव का वार्षिक मेला - CGKIRAN

आस्था एंव संस्कृति के पारंम्परिक रंगों से सजता है कोण्डागांव का वार्षिक मेला


बस्तर संभाग के अन्य मेलों में जिला कोण्डागांव के वार्षिक मेले का अपना अलग स्थान है । यूं तो बस्तर में मेले मंडई की ऐतिहासिकता सर्वविदित है और कोण्डागांव मेला भी इससे अछूता नहीं है। यहां होली से ठीक 5 दिन पहले भरने वाले इस मेले में आस्था और संस्कृति की अवधारणा मूर्त रूप में नजर आती है। जिले का ऐतिहासिक और पारंपरिक मेला विधिवत रूप से शुरू हो गया है. लगभग 700 वर्षों से चली आ रही यह गौरवशाली परंपरा आज भी आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का अद्भुत प्रतीक बनी हुई है.  मेले की शुरुआत देवी-देवताओं की पावन परिक्रमा के साथ हुई. मेला परिसर में देवी-देवताओं की शोभायात्रा और परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन, जयकारों और पूजा-अर्चना के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. इस आयोजन में 24 परगना से देवी-देवताओं का समागम होता है, जो क्षेत्रीय एकता और समरसता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है  छः दिवसीय इस मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रहेगी.  रात को  जिले के विभिन्न अंचलों से आए आदिवासी लोक नर्तक दलों के बीच प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी. यह प्रतियोगिता क्षेत्र की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक नृत्य शैलियों और वेशभूषा की जीवंत झलक प्रस्तुत करेगी. स्थानीय ग्रामीणों और बाहर से आए दर्शकों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है.. 

विगत 700 सालों से कोंडागांव का लोकप्रिय वार्षिक महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है. नगर पालिका परिषद कोंडागांव और ग्राम देव शीतला माता के नेतृत्व में होता है. हर उल्लास के साथ सात दिनों तक महोत्सव मनाया जाता है. यहां आने वाले भक्तों के लिए हर तरह की व्यवस्था की गई है। इस देव मेले में आसपास के देवी देवता आते हैं. हम कोंडागांव के साथ साथ पूरे छत्तीसगढ़ की सुख समृद्धि की कामना करते हैं. ऐतिहासिक मेला का सभी को इंतजार रहता है. मेले के दौरान ग्रामीण हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और विभिन्न प्रकार के दुकानों से मेला परिसर गुलजार रहेगा. यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सहेजने का महाउत्सव है. रविवार 1 मार्च को मेले का समापन होगा. तब तक कोंडागांव में आस्था, संस्कृति और उत्सव का यह संगम निरंतर जारी रहेगा.

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