अरुण साव बोले- बस्तर ओलंपिक में आत्मसमर्पित नक्सली को भी प्रतिभा दिखाने के लिये मिलेगा मंच
इस बार एथलेटिक्स में 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर,, लम्बी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस-थ्रो, जैवलिन-थ्रो, 4X100 मीटर रिले रेस गेम होंगे। साथ ही तीरंदाजी, फुटबॉल, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन, कराटे, वॉलीबॉल और महिला सीनियर वर्ग के लिए रस्साकसी सहित जिला स्तर पर हॉकी और वेट लिफ्टिंग की स्पर्धाएं भी होंगी। जूनियर वर्ग में बालक, बालिकाओं व सीनियर वर्ग में महिला और पुरुषों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी। इससे न केवल आधुनिक खेलों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय परंपरा से जुड़े खिलाड़ियों को भी मंच मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने मन की बात में बस्तर ओलंपिक का जिक्र किया था, जो हमारे लिए गौरव की बात है। बस्तर के युवाओं को मंच देने के लिए बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। विजेताओं को खेल आकादमी में प्रवेश दिया जाता है। विजयी प्रतिभागियों को जिला और संभाग स्तर पर नगद पुरस्कार, मेडल, ट्रॉफी और शील्ड दिये जाते हैं। नगद राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिये खिलाड़ियों के बैंक खाते में जमा कराई जाती है। संभागीय स्तर के विजेता खिलाड़ियों को “बस्तर यूथ आइकॉन” के रूप में प्रचारित किया जाएगा। यह ‘स्पोर्ट्स फॉर पीस’ मॉडल बस्तर में नई सामाजिक चेतना का प्रतीक बनेगा।
