अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिन रखेंगी हरतालिका तीज व्रत
सुहागिन महिलाओं की हरतालिका तीज में गहरी आस्था है। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुहागिन स्त्रियों को शिव-पार्वती अखंड सौभाग्य का वरदान देते हैं। वहीं कुंवारी लड़कियों को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। हरतालिका तीज की महिमा को अपरंपार माना गया है। हिन्दू धर्म में विशेषकर सुहागिन महिलाओं के लिए इस पर्व का महात्म्य बहुत ज्यादा है। हरतालिका तीज व्रत हिंदू धर्म में मनाये जाने वाला एक प्रमुख व्रत है।
अंचल में तिजहारिन द्वारा हरतालिका तीज को लेकर उत्साह है। सुहागिन तीज मनाने के लिए अपने मायके आ चुकी हैं। जिन महिलाओं का मायके आना संभव नही हो सका है, उनके द्वारा अपने ससुराल मे ही रहकर इस उत्सव को धूमधाम से मनाने की योजना बना ली गई है। भद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाया जाने वाला पर्व हरतालिका तीज गुरुवार से प्रारंभ होगा। रात में सुहागिन करेला-चावल (करू भात) ग्रहण कर उपवास रखेंगी। पति की दीर्घायु एवं परिवार के सुख समृद्धि के लिए यह व्रत मायके मे रखा जाता है। पर्व को हर्षोल्लास से मनाने के लिए बेटियां अपने मायके पहुंच चुकी हैं। बाजार में भी खूब रौनक है। पखवाड़े भर से बाजार मे रौनक बनी हुई है। बुधवार को भी खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ी रही।
परंपरानुसार गुरुवार रात को करू भात के साथ उपवास प्रारंभ करेंगी। मान्यता है कि कड़वे और मीठे का अनुभव सहते हुए बेटी अपने ससुराल में सुखी जीवन व्यतीत करे। इस पर्व मे सुहागिन 36 घंटे का निर्जला व्रत रखेंगी, उसके बाद दूसरे दिन शुक्रवार शाम को एक स्थान पर एकत्र होकर परिवार की अन्य महिलाओं के साथ शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना करेंगी।
हरितालिका तीज महाव्रत भाद्र मास की तृतीया तिथि के साथ चतुर्थी तिथि के मिलने पर मनाया जाता है। तृतीय तिथि होने के कारण इसे तीज नाम पड़ा। ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती के पिता हिमवान भगवान विष्णु के साथ पार्वती की शादी करना चाहते थे। यह माता पार्वती को पसंद नहीं था। इसीलिए माता पार्वती की सखियां उन्हें भगाकर जंगल में लेकर चली गयीं। लिहाजा इस व्रत का हरितालिका नाम पड़ा। चूकि, माता पार्वती ने कुंवारी अवस्था में इस व्रत को किया था। इसीलिए, इसे कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर के लिए करती हैं। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में रखा जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 107 जन्म लिये। उनके कठोर तप के कारण 108वें जन्म में भोले बाबा ने पार्वती जी को अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
निर्जला रखा जाता है व्रत
हरतालिका तीज व्रत करवा चौथ की तरह ही रखा जाता है। इस व्रत में पानी नहीं पिया जाता। यह व्रत निर्जला रखा जाता है। अगर व्रत के दौरान सूतक लग जाए तो व्रत रख सकते हैं और पूजा रात में कर सकते हैं। हरतालिका तीज पर रात में जगकर माता पार्वती व भगवान भोलेनाथ की पूजा करनी चाहिए।
सोलह श्रृंगार व मायके की साड़ी
ऐसी मान्यता है कि तीजा पर्व में महिलाएं सोलह श्रृंगार करके मायके की साड़ी पहनती हैं। सोलह श्रृंगार में बन संवरकर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। मायका पक्ष बेटियों के स्वागत में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। बेटियां भी पूरे उत्साह के साथ अपने परिवार से मिलती हैं। गांव में खासकर अपनी सहेलियों और स्वजनों के जाकर मेल-मिलाप करती हैं।
ठेठरी, खुर्मी व गुजिया
सोहारी पर्व पर घरों में अनेक प्रकार के छत्तीसगढ़ व्यंजन ठेठरी, खुर्मी, गुजिया-सोहारी आदि नमकीन एवं मीठे पकवान बनाए जा रहे हैं। सुहागिनों का बसों एवं निजी वाहनों से मायके पहुंचने का सिलसिला जारी है। बिलासपुर में ज्यादातर ट्रेनें अभी रद होने के कारण बसों में महिलाओं एवं बच्चों की भीड़ है।
